Chhattisgarh: 75 हजार शिक्षकों की कुर्सी पर संकट, टीईटी अग्निपरीक्षा में 92 प्रतिशत फेल
सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के फैसले के बाद 75,000 से अधिक गैर-टीईटी (TET) शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। हालिया टीईटी परीक्षा में 92% शिक्षक अनुत्तीर्ण रहे हैं, जिससे उनकी सेवा जारी रखने की योग्यता पर सवाल उठ गए हैं। 5 वर्ष से कम सेवा शेष वाले शिक्षकों को छोड़कर, अनिवार्य टीईटी पास न करने पर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ सकता है
शिक्षकों की कुर्सी पर संकट! टीईटी परीक्षा को लेकर बड़ा सवाल
प्रदेश में एक बार फिर शिक्षक भर्ती और योग्यता को लेकर बहस तेज हो गई है। टीईटी (Teacher Eligibility Test) को लेकर उठ रहे सवाल अब सीधे हजारों शिक्षकों की कुर्सी तक पहुंच गए हैं।
पिछले कुछ समय से यह मुद्दा चर्चा में है कि क्या टीईटी की अनिवार्यता और उसकी वैधता से पहले से कार्यरत शिक्षकों की नौकरी पर असर पड़ेगा। कई अभ्यर्थी और संगठन इसको लेकर आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि नियमों में बार-बार बदलाव से न केवल भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि पहले से नौकरी कर रहे शिक्षकों के सामने भी असमंजस की स्थिति बन जाती है।
दूसरी तरफ सरकार और शिक्षा विभाग का तर्क है कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए टीईटी जरूरी है। इसके बिना योग्य शिक्षकों का चयन संभव नहीं है। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या पुराने नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों पर नए नियम लागू करना न्यायसंगत होगा?
इस पूरे मामले ने कई शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। उन्हें डर है कि कहीं उनकी नौकरी पर कोई खतरा न आ जाए। वहीं, अभ्यर्थी चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और एक समान नियमों के तहत पूरी हो।
👉 अब नजरें आने वाले फैसलों और संभावित कोर्ट सुनवाई पर टिकी हैं। यही तय करेगा कि टीईटी का यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है और शिक्षकों की कुर्सी सुरक्षित रहती है या नहीं।
