छात्राओं के लिए बड़ी सीख: रील्स की आदत कम करें, किताबों से दोस्ती बढ़ाएं — शिक्षा मंत्री का संदेश
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री Sandeep Singh ने छात्राओं को एक महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन और रील्स का बढ़ता इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई पर असर डाल रहा है, इसलिए छात्रों को सोशल मीडिया का उपयोग सीमित करते हुए किताबों से अधिक जुड़ने की जरूरत है।
लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा, खेल और सामाजिक बदलाव के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली 23 प्रतिभाशाली बालिकाओं को सम्मानित भी किया गया। यह आयोजन महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से किया गया था।
डिजिटल दौर में संतुलन जरूरी
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा कि डिजिटल शिक्षा आज के समय की जरूरत बन चुकी है, लेकिन इसका संतुलित उपयोग करना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने बताया कि रील्स और शॉर्ट वीडियो देखने की आदत धीरे-धीरे बच्चों के समय को खा जाती है। अक्सर देखा जाता है कि एक वीडियो खत्म होते ही दूसरा शुरू हो जाता है और बच्चे घंटों मोबाइल में व्यस्त रहते हैं।
उनका मानना है कि अगर यही समय पढ़ाई, किताबों या किसी रचनात्मक गतिविधि में लगाया जाए तो छात्रों का भविष्य और भी बेहतर हो सकता है। यही कारण है कि उन्होंने छात्राओं को रील्स की आदत सीमित करने और पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देने की सलाह दी।
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बालिकाओं को मिला सम्मान
इस कार्यक्रम में उन छात्राओं को सम्मानित किया गया जिन्होंने शिक्षा, खेल और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में अच्छा काम किया है।
समारोह का आयोजन UNICEF के सहयोग से किया गया था, जिसमें कई छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन भी किया। गीत, नृत्य, योग और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से करीब 850 बालिकाओं ने महिला शक्ति और आत्मसम्मान का संदेश दिया।
कार्यक्रम में शिक्षा और समाज से जुड़े विषयों पर आधारित 22 विशेष स्टॉल भी लगाए गए, जहां छात्राओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं और अवसरों की जानकारी दी गई।
स्कूलों में बदल रहा शिक्षा का माहौल
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है।
सरकार की latest update के अनुसार अब स्कूलों में बेहतर शैक्षिक वातावरण देने के लिए डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कई विद्यालयों में स्मार्ट क्लास शुरू की जा रही हैं और प्रत्येक स्कूल को दो टैबलेट भी दिए जा रहे हैं ताकि पढ़ाई को और प्रभावी बनाया जा सके।
इस पहल का उद्देश्य यह है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के छात्रों को समान शैक्षिक अवसर मिल सकें।
विज्ञान और तकनीक से जुड़ने की अपील
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी छात्राओं को भविष्य की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि आज के समय में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) जैसे विषयों में अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। अगर छात्राएं इन क्षेत्रों में आगे बढ़ती हैं तो न सिर्फ उनका करियर मजबूत होगा बल्कि देश के विकास में भी उनकी बड़ी भूमिका होगी।
यह भी बताया गया कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में कई government benefits और योजनाएं चला रही है ताकि छात्राएं बिना किसी बाधा के पढ़ाई जारी रख सकें।
गांव की बेटियां बन रहीं नई मिसाल
कार्यक्रम में कुछ ऐसी प्रेरणादायक कहानियां भी सामने आईं जिन्होंने सभी का ध्यान खींचा।
उत्तर प्रदेश के कई गांवों में अब बेटियां पढ़ाई के जरिए नई पहचान बना रही हैं। उदाहरण के तौर पर बिजनौर जिले के एक गांव की छात्रा अपने गांव की पहली महिला स्नातक बनने की दिशा में पढ़ाई कर रही है। वह खुद पढ़ाई करने के साथ-साथ अपने समुदाय की छोटी लड़कियों को भी शिक्षा के लिए प्रेरित करती है।
इसी तरह बाराबंकी जिले की एक छात्रा ने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद शहर में बसने के बजाय अपने गांव में ही रहकर बच्चों, खासकर लड़कियों की शिक्षा और अधिकारों के लिए काम करने का फैसला किया।
ऐसी कहानियां यह दिखाती हैं कि शिक्षा के जरिए ग्रामीण इलाकों की बेटियां भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर रही हैं।
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