जनगणना-2027 की प्रक्रिया शुरू , जनगणना में गलत जानकारी देने और असहयोग पर होगी तीन साल की सजा

जनगणना-2027 की प्रक्रिया शुरू , जनगणना में गलत जानकारी देने और असहयोग पर होगी तीन साल की सजा

तीन साल की सजा व एक हजार रुपये अर्थदंड का है प्रावधान

, लखनऊ :

प्रदेश में जनगणना-2027 की प्रक्रिया मई से शुरू होने जा रही है। पहली बार डिजिटल जनगणना में लोगों को स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने का मौका भी मिलेगा, लेकिन इसके साथ ही एक सख्त नियम भी लागू होगा।जनगणना में गलत जानकारी देना या सवालों का जवाब देने से इंकार करना दंडनीय अपराध माना जाएगा। इसके तहत एक हजार रुपये तक का जुर्माना और कुछ परिस्थितियों में तीन साल तक की जेल हो सकती है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे जनगणना में पूरी ईमानदारी से सही जानकारी दें, क्योंकि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सरकारी योजनाएं और विकास की दिशा तय होती है।

 

प्रदेश में सात मई से 21 मई तक स्वगणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) की सुविधा दी जाएगी। इस दौरान नागरिक ऑनलाइन माध्यम से स्वयं अपने और अपने परिवार से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 22 मई से प्रगणक (एन्यूमरेटर) घर-घर जाकर जनगणना करेंगे और परिवारों से तथ्यों के आधार पर जानकारी एकत्र करेंगे।

 

स्वगणना में एक नंबर आएगा, उस नंबर को प्रगणक से साझा करने पर जनगणना पूरी मानी जाएगी। जनगणना अधिकारियों के अनुसार स्वगणना हो या प्रगणक द्वारा की जाने वाली गणना, दोनों स्थितियों में सही जानकारी देना अनिवार्य है।

 

जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत गलत जानकारी देना, प्रश्नों का उत्तर देने से मना करना या जनगणना अधिकारियों के कार्य में बाधा डालना अपराध की श्रेणी में आता है। गलत जानकारी देना, सवालों का जवाब न देना, जनगणना अधिकारी को काम से रोकना, जनगणना फार्म न भरना या घर पर लगाए गए जनगणना चिह्न या नंबर को हटाने जैसे मामलों में कार्रवाई की जा सकती है।

 

जागरूकता अभियान भी चलेगा

जनगणना शुरू होने से पहले लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। ‘प्रगति और विकास’ जैसे पत्र पर आधारित एनीमेशन वीडियो के माध्यम से भी लोगों को सही जानकारी देने और जनगणना में भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा।

 

पहले चरण में प्रगणक परिवारों से 33 सवालों के जवाब लेंगे। इनमें मकान नंबर, मकान की स्थिति, परिवार के मुखिया का नाम, घर में उपलब्ध सुविधाएं और परिसंपत्तियों से जुड़ी जानकारी शामिल होगी।

 

हर घर की जियो-टैगिंग नहीं की जाएगी, बल्कि पूरी आबादी को समूह रूप से टैग किया जाएगा। मोबाइल नंबर भी लिए जा सकते हैं।जनगणना के माध्यम से जनसंख्या, शिक्षा, आवास, स्वास्थ्य, रोजगार, सुविधाओं और संसाधनों की वास्तविक स्थिति का पता चलता है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सरकार विकास योजनाएं, बजट और कल्याणकारी कार्यक्रम तैयार करती है।

अधिकारियों के अनुसार जनगणना के दौरान दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। जनगणना अधिनियम के तहत अधिकारी बिना अनुमति किसी व्यक्ति की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति या संस्था से साझा नहीं कर सकते। डिजिटल जनगणना में भी डेटा सुरक्षा के सभी मानकों का पालन किया जाएगा।

Leave a Comment