Breaking news:- अनुदेशकों को मिलेगा 9 साल का एरियर! ₹17,000 मानदेय लागू , एरियर भुगतान का आदेश
अंशकालिक शिक्षकों के मानदेय और नियमितता को लेकर अहम फैसला लगातार वर्षों तक एक ही पद पर सेवाएं देने वाले अंशकालिक/संविदा शिक्षकों को लेकर अब स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होती नजर आ रही है। यह मामला केवल मानदेय का नहीं, बल्कि न्याय, श्रम अधिकार और सरकारी जिम्मेदारी से जुड़ा है।
10 साल तक एक ही पद पर कार्य = नियमित सेवा का आधार
यदि कोई अनुदेशक या अंशकालिक शिक्षक लगातार 10 वर्षों तक एक ही पद पर कार्य करता रहा है, तो उसे केवल अस्थायी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
व्यवहारिक रूप से यह सेवा नियमित प्रकृति की मानी जाएगी और ऐसे मामलों में सरकार का यह तर्क स्वीकार्य नहीं कि पद अस्तित्व में नहीं है।
संविदा अवधि के बाद भी कार्य = पद का स्वतः सृजन
जब कोई संविदा कर्मी:
एक वर्ष से अधिक समय तक कार्य करता है, और
संविदा अवधि समाप्त होने के बाद भी उसी पद पर सेवाएं देता रहता है,
तो वह पद स्वतः सृजित (Deemed Created Post) माना जाएगा।
ऐसी स्थिति में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उस पद के अनुरूप उचित मानदेय और लाभ प्रदान करे।
अन्यत्र रोजगार पर रोक = संविदा नहीं, स्थायी दायित्व
अंशकालिक शिक्षकों को अन्यत्र रोजगार करने से प्रतिबंधित किया गया।
इससे यह साफ होता है कि उनकी नियुक्ति केवल “अस्थायी” नहीं रही, बल्कि सरकार ने उनसे पूर्ण प्रतिबद्धता की अपेक्षा की।
कानूनी दृष्टि से यह स्थिति पद के स्वतः सृजन को और मजबूत करती है।
2013 के ₹7,000 मानदेय में संशोधन न होना – अनुचित श्रम व्यवहार
वर्ष 2013 में निर्धारित ₹7,000 प्रतिमाह मानदेय को लंबे समय तक बिना संशोधन के जारी रखना:
महंगाई के दौर में अव्यावहारिक है
और Unfair Labour Practice की श्रेणी में आता है
सरकारी नीतियों में समय-समय पर मानदेय/वेतन पुनरीक्षण अनिवार्य माना जाता है।
आधिकारिक निष्कर्ष और दिशा-निर्देश
उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट किया जाता है कि:
✅ मानदेय पुनरीक्षण का अधिकार
उत्तर प्रदेश में कार्यरत अंशकालिक शिक्षक वर्ष 2013 के मानदेय के पुनरीक्षण के पूर्ण अधिकार रखते हैं।
यह पुनरीक्षण:
नियत अवधि पर,
और यदि संभव न हो तो कम-से-कम वार्षिक आधार पर किया जाना आवश्यक है।
✅ नया मानदेय तय
अंशकालिक शिक्षकों का मानदेय:
वर्ष 2017–18 से ₹17,000 प्रतिमाह निर्धारित माना जाएगा
यह राशि अगले वेतन/मानदेय पुनरीक्षण तक प्रभावी रहेगी।
एरियर और भुगतान से जुड़ा स्पष्ट आदेश
सरकार को निर्देशित किया जाता है कि
वर्ष 2017 से 31 मार्च 2026 तक ₹17,000 प्रतिमाह के हिसाब से एरियर तैयार कर भुगतान करे।
संशोधित मानदेय का नियमित भुगतान
01 अप्रैल 2026 से शुरू किया जाएगा।
समस्त बकाया राशि का भुगतान
आज की तिथि से 6 माह के भीतर करना अनिवार्य होगा।
निष्कर्ष
यह फैसला अंशकालिक शिक्षकों के लिए सिर्फ आर्थिक राहत नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की मान्यता है।
लगातार सेवा देने वाले शिक्षकों को वर्षों तक अनदेखा नहीं किया जा सकता।
अब उम्मीद है कि सरकार समयबद्ध तरीके से आदेश का पालन करेगी।