भाजपा का बड़ा फैसला: 11 जिलाध्यक्षों के नाम घोषित, चार जिलों में अब भी इंतज़ार

भाजपा का बड़ा फैसला: 11 जिलाध्यक्षों के नाम घोषित, चार जिलों में अब भी इंतज़ार

लंबे समय से चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने गुरुवार देर रात 11 जिलों के नए जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी। पार्टी मुख्यालय से जारी इस official announcement के बाद प्रदेश की संगठनात्मक राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

सूत्रों के मुताबिक, सूची जारी करने से पहले प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के बीच लंबी चर्चा हुई। माना जा रहा है कि यह फैसला पूरी रणनीति और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर लिया गया है।

सामाजिक समीकरण पर खास फोकस

जारी सूची पर नजर डालें तो साफ दिखता है कि पार्टी ने जातीय संतुलन का पूरा ध्यान रखा है।

3 ब्राह्मण

1 ठाकुर

1 वैश्य

1 कायस्थ

3 पिछड़ा वर्ग (2 मौर्य, 1 कश्यप)

2 दलित चेहरे

यानी संगठन में eligibility और सामाजिक प्रतिनिधित्व दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश की गई है। अयोध्या और मीरजापुर में पासी समाज को जिम्मेदारी देकर पार्टी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह हर वर्ग को साथ लेकर चलना चाहती है।

खास बात यह रही कि अमरोहा को छोड़कर बाकी सभी जिलों में नए चेहरों को मौका दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी संगठन में नई ऊर्जा और नई रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है।

अब तक 94 जिलाध्यक्ष घोषित, 4 जिलों में बाकी

अब तक पार्टी 94 जिलाध्यक्षों की घोषणा कर चुकी है। चार जिलों—अंबेडकर नगर, देवरिया, वाराणसी जिला और चंदौली—में नामों का ऐलान होना अभी बाकी है। इन जिलों को लेकर जल्द ही latest update आने की संभावना जताई जा रही है।

क्षेत्रवार घोषित जिलाध्यक्षों की सूची

🔹 पश्चिम क्षेत्र

शामली – रामजी लाल कश्यप

अमरोहा – उदय गिरि गोस्वामी

सहारनपुर – अजीत सिंह राणा

बागपत – नीरज शर्मा

🔹 ब्रज क्षेत्र

पीलीभीत – गोकुल प्रसाद मौर्य

लखीमपुर – अरविन्द गुप्ता

🔹 अवध क्षेत्र

गोण्डा – इकबाल बहादुर तिवारी

अयोध्या जिला – राधे श्याम त्यागी

अयोध्या महानगर – कमलेश श्रीवास्तव

🔹 काशी क्षेत्र

मीरजापुर – लाल बहादुर सरोज

🔹 गोरखपुर क्षेत्र

सिद्धार्थनगर – दीपक मौर्य

संगठनात्मक रणनीति क्या कहती है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आने वाले चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया गया है। संगठन की मजबूती जमीनी स्तर से शुरू होती है, और जिलाध्यक्ष ही पार्टी का पहला चेहरा होते हैं।

जैसे किसी बड़े संस्थान में मैनेजमेंट टीम की नई नियुक्तियां दिशा तय करती हैं, वैसे ही पार्टी संगठन में ऐसे बदलाव भविष्य की रणनीति का संकेत देते हैं।

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