बिजली दरों पर बड़ा अपडेट, 20 लाख लोगों को राहत, 340 संविदा कर्मियों को हटाया

बिजली दरों पर बड़ा अपडेट, 20 लाख लोगों को राहत, 340 संविदा कर्मियों को हटाया

उत्तर प्रदेश में बिजली को लेकर एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। एक तरफ ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए राहत की उम्मीद जगी है, तो दूसरी ओर कर्मचारियों की छंटनी ने चिंता बढ़ा दी है।

ताजा जानकारी के मुताबिक, राज्य में करीब 20 लाख ऐसे उपभोक्ता हैं जो अपने घर से छोटा-मोटा काम करते हैं। अब नई बिजली दरों पर चल रही सुनवाई में उनके मुद्दे पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है।

🏠 घर से दुकान चलाने वालों को मिल सकती है राहत

गांवों में अक्सर लोग अपने घर से ही रोज़गार चलाते हैं। कोई सिलाई करता है, कोई किराने की छोटी दुकान खोल लेता है, तो कोई मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता है।

समस्या तब शुरू होती है जब बिजली विभाग इन कनेक्शनों को घरेलू की जगह कमर्शियल मान लेता है। इससे बिल बढ़ जाता है और कई बार तो बिजली चोरी तक के केस दर्ज हो जाते हैं।

अब इस पूरे मामले को लेकर चल रही सुनवाई में राहत की बात सामने आई है। माना जा रहा है कि नई दरें तय करते समय ऐसे उपभोक्ताओं को कुछ नरमी मिल सकती है।

📊 पहले भी उठ चुका है मामला

यह मुद्दा नया नहीं है। साल 2019 में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसे उठाया था।

परिषद की तरफ से सुझाव दिया गया था कि छोटे स्तर पर काम करने वाले ग्रामीण उपभोक्ताओं के साथ सख्ती न की जाए। खासकर उन लोगों को राहत मिले जिनकी बिजली खपत सीमित है।

बताया जाता है कि बिजली कंपनियों ने भी इस पर अपनी राय दी थी। सुझाव यह था कि 2 किलोवॉट तक के कनेक्शन और करीब 200 यूनिट तक खपत वाले उपभोक्ताओं को कुछ शर्तों के साथ घरेलू श्रेणी में रखा जा सकता है।

हालांकि, इस पर अभी तक अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन हाल की बैठकों में यह मुद्दा फिर से जोर पकड़ रहा है।

⚠️ दूसरी तरफ कर्मचारियों में बढ़ी चिंता

जहां एक ओर उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ बिजली विभाग के कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि बड़े स्तर पर अभियंताओं पर कार्रवाई की तैयारी हो रही है।

समिति के मुताबिक हाल ही में हुई बैठक में अधिकारियों से निलंबन के लिए नामों की सूची तैयार करने को कहा गया है। इसमें कई वरिष्ठ और कनिष्ठ अभियंता शामिल हो सकते हैं।

👷‍♂️ संविदा कर्मियों की छंटनी तेज

सबसे ज्यादा असर संविदा कर्मचारियों पर दिख रहा है।

लखनऊ समेत प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार छंटनी की जा रही है। अकेले लखनऊ में इस महीने करीब 340 संविदा कर्मियों को नौकरी से हटाया जा चुका है।

ऐसे में कर्मचारियों का कहना है कि अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में बिजली व्यवस्था पर असर पड़ सकता है—खासकर गर्मी के मौसम में।

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