बेसिक शिक्षा अधिकारी के दफ्तर का सिस्टम देख DM भी दंग, BSA के खिलाफ सस्पेँड शासन
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय की कार्यप्रणाली उस समय कठघरे में आ गई, जब एक सहायक शिक्षक की आत्महत्या के मामले में प्रशासनिक जांच के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आई। हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद एक साल तक फाइल दबाए रखने का मामला सामने आने पर जिलाधिकारी दिव्या मित्तल भी हैरान रह गईं।
हाईकोर्ट आदेश के बाद भी फाइल क्यों अटकी रही?
गौरीबाजार स्थित मदरसन विद्यालय के सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के बाद गठित जिला और शासन स्तरीय जांच समितियों ने जब दस्तावेज खंगाले, तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई।
फरवरी 2025 में हाईकोर्ट से शिक्षक के पक्ष में आदेश आने के बावजूद, बीएसए कार्यालय में संबंधित पत्रावली पूरे एक वर्ष तक बिना निस्तारण के पड़ी रही।
DM का औचक निरीक्षण, बीएसए से सीधे सवाल
सोमवार को डीएम दिव्या मित्तल स्वयं बीएसए कार्यालय पहुंचीं। जब उन्होंने यह पूछा कि हाईकोर्ट के आदेश पर एक साल में भी निर्णय क्यों नहीं हुआ, तो बीएसए शालिनी श्रीवास्तव कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं।
“पटल परिवर्तन” जैसे कारणों को सुनकर डीएम का रुख सख्त हो गया। यहीं से यह साफ हो गया था कि इस मामले में कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई तय है।
जांच कमेटी की रिपोर्ट में बीएसए दोषी
जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच समिति, जिसकी अध्यक्षता राजेश कुमार सिंह कर रहे थे, ने अपनी रिपोर्ट में बीएसए को प्रथम दृष्टया दोषी माना। समिति में संयुक्त मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा और एडीआईओएस नीलेश पांडेय भी शामिल रहे।
आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बीएसए के निलंबन की संस्तुति शासन को भेज दी है।
शिक्षक की आत्महत्या ने हिलाया शिक्षा तंत्र
कृष्ण मोहन सिंह ने 20 फरवरी की रात गोरखपुर में फांसी लगाकर जान दे दी थी। उन्होंने सुसाइड नोट और वीडियो में बीएसए कार्यालय के एक लिपिक सहित कई लोगों पर मानसिक उत्पीड़न और 16 लाख रुपये की अवैध वसूली का आरोप लगाया था।
यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यसंस्कृति पर सवाल बन चुका है।
वेतन बहाली के नाम पर खेल?
सूत्रों के मुताबिक, कृष्ण मोहन सिंह समेत तीन शिक्षकों से वेतन बहाली के लिए भारी रकम ली गई, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। यह सवाल अब जांच के केंद्र में है कि सरकारी लाभ और न्यायिक आदेशों को नजरअंदाज कर किसके इशारे पर फाइलें दबाई गईं।
कर्मचारी और “सिस्टम” भी रडार पर
बीएसए कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप हैं कि कुछ लोगों के परिजन प्रबंधकीय विद्यालयों में नियुक्त हैं, तो कहीं नजराना लेकर फाइल आगे बढ़ाने की संस्कृति हावी है।
जांच आगे बढ़ने पर और भी परतें खुलने की संभावना जताई जा रही है।
शिक्षक संगठनों का विरोध, गिरफ्तारी की मांग
बीएसए के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आजाद हिंद सेना वाहिनी ने प्रदर्शन किया। संगठन के संस्थापक ऋषि पांडेय ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
पुलिस जांच और CCTV फुटेज अहम
गोरखपुर में दर्ज मुकदमे की विवेचना अब तेज हो गई है। पुलिस जल्द ही बीएसए कार्यालय के CCTV फुटेज अपने कब्जे में ले सकती है, जिससे अन्य मामलों के भी खुलासे होने की उम्मीद है।
कैंडल मार्च में उमड़ा शिक्षक समाज
सोमवार शाम राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने कैंडल मार्च निकालकर दिवंगत शिक्षक को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी भी मौजूद रहे।
शिक्षक नेताओं ने कहा कि यह घटना केवल एक शिक्षक की नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए चेतावनी है।
एक विद्यालय, दो प्रधानाचार्य?
जांच के दौरान एक और गंभीर आरोप सामने आया। कृषक उमा विद्यालय सिसई में दो प्रधानाचार्य दर्शाकर 1.44 करोड़ रुपये का वेतन बिल पारित किए जाने का मामला उठा है। प्रबंध समिति की सदस्य रेखा यादव ने सीडीओ के सामने दस्तावेज प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
DM का स्पष्ट संदेश
डीएम दिव्या मित्तल ने साफ कहा कि
“कोर्ट के आदेश की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई हर हाल में होगी।”
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम, जवाबदेही और शिक्षक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। अब निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं। अगर जांच निष्पक्ष रही, तो यह प्रकरण शिक्षा विभाग में सुधार की मिसाल भी बन सकता है।