मुहूर्त: होलिका दहन के एक दिन बाद खेला जाएगा रंग, कब है होलिका दहन? जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त
होलिका दहन 2026 कब? (Holika Dahan 2026 Date and Shubh Muhurat)
प्रयागराज, संवाददाता। इस बार भद्रा व चंद्रग्रहण के बीच होने की वजह से होलिका दहन के एक दिन बार रंगों का त्योहार मनाया जाएगा। तीन मार्च को साल का पहला व आखिरी चंद्रग्रहण लगने जा रहा है, जोकि भारत में दृश्यमान रहेगा और उसकी अवधि शाम छह बजे से लेकर 6.48 बजे तक रहेगा। उत्थान ज्योतिष एवं अध्यात्म संस्थान के निदेशक पं. दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली ने बताया कि ग्रस्तोदित ग्रहण की वजह से होलिका से संबंधित कोई कार्य नहीं होगा।
निदेशक ने बताया कि होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में भद्रा की अनुपस्थिति में किया जाता है लेकिन इस वर्ष मृत्युलोक की भद्रा पूर्णिमा के आरंभ के साथ ही दो मार्च को शाम 5.18 बजे लग जाएगी। भद्रा मुख का परित्याग कर भद्रा के पुच्छ में रात 11.30 बजे से 12.50 बजे से पूर्व होलिका का दहन करना श्रेयस्कर होगा। ग्रहण का सूतक काल नौ घंटे पहले शुरू हो जाएगा। इस प्रकार तीन को सुबह नौ बजे लग जाएगा, इसलिए उस दिन होली नहीं खेली जाएगी। स्वामी नरोत्तमानंद गिरि वेद विद्यालय के प्राचार्य ब्रज मोहन पांडेय ने बताया कि इस वर्ष तीन को पहला व आखिरी चंद्रग्रहण लग रहा है जो यहां दिखाई देगा। होलिका पूजन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि की शाम या प्रदोष काल में किया जाता है। इस बार तीन को पूर्णिमा तिथि शाम 5.56 बजे तक रहेगी। इसकी वजह से चार मार्च को चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि को ही रंगोत्सव मनाया जाएगा।
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। हर साल यह पर्व फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। साल 2026 में होली की तारीख को लेकर लोगों के मन में थोड़ी कन्फ्यूजन है कि होलिका दहन 2 मार्च या 3 मार्च कब मनाया जाएगा? हिंदू पंचांग के अनुसार, आइए होलिका दहन (Holika Dahan 2026) की सही तारीख और पूजा का शुभ समय जानते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 02 मार्च को शाम 05 बजकर 55 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 03 मार्च को शाम 05 बजकर 07 मिनट पर होगा। ज्योतिषियों की मानें तो 02 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा, क्योंकि 03 मार्च चंद्र ग्रहण लग रहा है। साथ ही 04 मार्च को होली मनाई जाएगी।
होलिका दहन के एक दिन बाद खेला जाएगा रंग, कब है होलिका दहन? जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त
होलिका दहन का महत्व (Holika Dahan 2026 Significance)
पौराणिक कथा के अनुसार, राक्षस हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। वह अपने ही भतीजे श्री हरि भक्त प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। यह पर्व बुराई पर अच्छाई जी जीत का प्रतीक है। इस दिन लोग होलिका की पूजा करते हैं और होलिका दहन की अग्नि में गाय के गोबर के उपले, गेहूं की बालियां और चने अर्पित करते हैं। साथ ही अग्नि की परिक्रमा लगाकर वे अपने घर-परिवार की सुख-समृद्धि और रोगों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं