आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा, डीएम को सौंपा गया ज्ञापन
कानपुर देहात में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की लंबे समय से चली आ रही मांगें एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उत्तर प्रदेश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका संघ के पदाधिकारियों ने गुरुवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपा। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा, कार्यकर्ताओं के लिए ₹24,000 और सहायिकाओं के लिए ₹12,000 मानदेय तय करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
संघ की जिलाध्यक्ष रेखा आर्या ने बताया कि आंगनबाड़ी सहायिकाएं वर्षों से न्यूनतम सुविधाओं के अभाव में काम कर रही हैं, जबकि उनसे जिम्मेदारियों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जीवन से जुड़ी लंबित मांगों और शोषण के खिलाफ छह सूत्रीय मांग पत्र प्रशासन को सौंपा गया है।
पोषण ट्रैकर और ऑनलाइन कार्य बना अतिरिक्त बोझ
ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया कि पोषण ट्रैकर ऐप और अन्य ऑनलाइन प्रक्रियाओं के लिए कार्यकर्ताओं को अपनी जेब से संसाधन जुटाने पड़ते हैं। ऐसे में ₹20,000 का स्मार्टफोन भत्ता और हर महीने ₹300 डाटा रिचार्ज भत्ता दिए जाने की मांग रखी गई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिना संसाधन दिए डिजिटल कार्य की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है।
पदोन्नति और आयु सीमा पर भी उठी आवाज
संघ ने यह भी मांग की कि मुख्य सेविका और सहायिका को योग्यता व वरिष्ठता के आधार पर कार्यकर्ता पद पर पदोन्नति दी जाए और पदोन्नति में लागू आयु सीमा समाप्त की जाए। इससे वर्षों से सेवा दे रहीं महिलाओं को सम्मान और स्थिरता दोनों मिल सकेगी।
सात मार्च तक निर्णय नहीं तो आंदोलन तय
जिला महामंत्री मंजू कटियार ने साफ कहा कि यदि सरकारी स्तर पर सात मार्च तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो अप्रैल से पोषण ट्रैकर सहित सभी ऑनलाइन कार्य बंद कर दिए जाएंगे। साथ ही आठ मार्च को प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लखनऊ पहुंचकर प्रदर्शन करेंगी।
इस दौरान जिला उपाध्यक्ष किरन लता, कार्यालय मंत्री प्रभा कुमारी, श्रीवती, सरला, संजेशलता, विनयप्रभा सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहीं।
निष्कर्ष
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता वर्षों से सरकारी योजनाओं की रीढ़ बनी हुई हैं, लेकिन अब वे केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि सरकारी मान्यता, सम्मान और सुविधाएं भी चाहती हैं। आने वाले दिनों में सरकार इस पर क्या फैसला लेती है, यह लाखों कार्यकर्ताओं के भविष्य से जुड़ा अहम मुद्दा बन चुका