टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का अभियान टीईटी अनिवार्यता को समाप्त किया जाए

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का अभियान टीईटी अनिवार्यता को समाप्त किया जाए

लखनऊ। टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने एक नया अभियान शुरू करने का फैसला किया है। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार से प्रदेश और देश के शिक्षक एक सप्ताह तक पत्र लिखकर अपनी बात सरकार तक पहुंचाएंगे।

महासंघ के अनुसार इस अभियान के तहत शिक्षक राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष को ई-मेल और पोस्टकार्ड भेजेंगे। इन पत्रों के माध्यम से शिक्षक यह मांग करेंगे कि जबरन लागू की जा रही टीईटी अनिवार्यता को समाप्त किया जाए।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य करना सही नहीं है। उनका तर्क है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय के नियमों के अनुसार हुई थी, उन पर बाद में नया नियम लागू करना उचित नहीं माना जा सकता।

महासंघ से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से शिक्षक इस मुद्दे को उठा रहे हैं। अब इस अभियान के माध्यम से अपनी बात सीधे देश के शीर्ष पदों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी, ताकि इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जा सके।

बताया जा रहा है कि टीईटी अनिवार्यता के विरोध को मजबूत करने के लिए करीब एक दर्जन शिक्षक संगठनों ने मिलकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ का गठन किया है। ये संगठन मिलकर शिक्षकों के हित से जुड़े मुद्दों को उठाने का काम कर रहे हैं।

शिक्षकों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार के सामने रख रहे हैं और उम्मीद है कि इस विषय पर उचित निर्णय लिया जाएगा।

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