UP बेसिक स्कूलों में अब घर-घर होगी बच्चों की तलाश, दो दिन अनुपस्थित रहने पर शिक्षक करेंगे संपर्क
उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने एक नई व्यवस्था शुरू की है। अब यदि कोई छात्र लगातार दो दिन तक स्कूल नहीं आता है तो शिक्षक केवल रजिस्टर में अनुपस्थिति दर्ज करके नहीं छोड़ेंगे, बल्कि बच्चे के घर जाकर उसकी अनुपस्थिति का कारण पता करेंगे। इस कदम का उद्देश्य बच्चों को दोबारा विद्यालय से जोड़ना और पढ़ाई से दूर होने की स्थिति को रोकना है।
प्रतापगढ़ सहित प्रदेश के अन्य जिलों में लागू की जा रही इस व्यवस्था के तहत शिक्षकों को छात्रों की उपस्थिति पर लगातार नजर रखनी होगी। अगर कोई बच्चा बिना सूचना के दो दिन या उससे अधिक समय तक विद्यालय नहीं आता है, तो संबंधित शिक्षक अभिभावकों से संपर्क करेंगे। जरूरत पड़ने पर शिक्षक घर जाकर बच्चे और परिवार से बातचीत करेंगे ताकि अनुपस्थिति की वास्तविक वजह सामने आ सके।
बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि कई बार बच्चे स्वास्थ्य समस्या, पारिवारिक परिस्थितियों, आर्थिक परेशानी या अन्य कारणों से विद्यालय से दूर हो जाते हैं। समय रहते जानकारी मिलने पर ऐसी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से शिक्षक बच्चों की स्थिति की जानकारी जुटाकर उसे प्रेरणा पोर्टल पर दर्ज करेंगे।
प्रेरणा पोर्टल पर दर्ज होगी पूरी जानकारी
नई व्यवस्था के अनुसार शिक्षक को बच्चे की अनुपस्थिति का कारण भी ऑनलाइन दर्ज करना होगा। यदि बच्चा बीमारी के कारण स्कूल नहीं आ रहा है, परिवार की किसी समस्या के कारण अनुपस्थित है या किसी अन्य वजह से पढ़ाई से जुड़ नहीं पा रहा है, तो इसकी जानकारी पोर्टल पर अपडेट की जाएगी।
इससे विभाग को यह समझने में मदद मिलेगी कि कितने बच्चे नियमित रूप से विद्यालय आ रहे हैं और किन कारणों से कुछ छात्र पढ़ाई से दूर हो रहे हैं। साथ ही जरूरत के अनुसार बच्चों और उनके परिवारों के लिए सहायता और जागरूकता के प्रयास किए जा सकेंगे।
शत-प्रतिशत उपस्थिति पर विभाग का जोर
सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में नामांकित सभी बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है। इसके लिए शिक्षकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षक अब केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि बच्चों की शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
इस पहल से ड्रॉपआउट की स्थिति को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार बच्चे लंबे समय तक स्कूल नहीं आ पाते हैं और धीरे-धीरे पढ़ाई छोड़ देते हैं। ऐसे मामलों में समय पर संपर्क होने से बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण
बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए शिक्षक और अभिभावक दोनों की जिम्मेदारी होती है। नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों को जहां बच्चों की उपस्थिति पर ध्यान देना होगा, वहीं अभिभावकों को भी बच्चों को नियमित विद्यालय भेजने के लिए जागरूक होना होगा।
नियमित उपस्थिति से बच्चों की पढ़ाई मजबूत होती है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। इसलिए विभाग की यह पहल केवल अनुपस्थिति रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने की दिशा में एक प्रयास है।