Solar Panel Types: बिजली बिल होगा जीरो! ऑन-ग्रिड, ऑफ-ग्रिड या हाइब्रिड, घर के लिए कौन-सा सोलर सिस्टम है बेस्ट?
आज के समय में बिजली का बढ़ता बिल हर परिवार के बजट पर असर डाल रहा है। गर्मियों में एसी, कूलर, फ्रिज और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के ज्यादा इस्तेमाल से बिजली की खपत बढ़ जाती है। वहीं कई जगहों पर बिजली कटौती की समस्या भी लोगों को परेशान करती है। ऐसे में सोलर पैनल सिस्टम एक ऐसा विकल्प बनकर सामने आया है, जिससे बिजली के खर्च को कम किया जा सकता है और लंबे समय तक बचत भी की जा सकती है।
घर की छत पर सोलर पैनल लगवाकर सूरज की रोशनी से बिजली तैयार की जाती है। एक बार सही तरीके से सोलर सिस्टम लग जाने के बाद कई सालों तक इसका फायदा मिलता है। यही कारण है कि आज देश के कई हिस्सों में लोग अपने घरों, दुकानों और छोटे व्यवसायों के लिए सोलर पैनल को अपना रहे हैं। लेकिन सोलर सिस्टम लगवाने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपके घर के लिए कौन-सा सिस्टम सही रहेगा।
बाजार में मुख्य रूप से तीन प्रकार के सोलर सिस्टम उपलब्ध हैं। इनमें ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम, ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम और हाइब्रिड सोलर सिस्टम शामिल हैं। हर सिस्टम की अपनी खासियत होती है और जरूरत के हिसाब से इसका चुनाव किया जाता है। सही सिस्टम चुनने से बिजली की बचत के साथ-साथ बेहतर प्रदर्शन भी मिलता है।
ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम क्या होता है?
What is an on-grid solar system?
ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला सोलर सिस्टम है। यह उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जहां बिजली की सप्लाई नियमित रहती है। इसमें सोलर पैनल को घर की छत पर लगाया जाता है और इसे बिजली ग्रिड से जोड़ा जाता है।
दिन के समय सोलर पैनल सूरज की रोशनी से बिजली बनाते हैं। इस बिजली का इस्तेमाल घर के उपकरण चलाने में किया जाता है। अगर जरूरत से ज्यादा बिजली बनती है तो अतिरिक्त बिजली नेट मीटरिंग के माध्यम से ग्रिड में भेजी जा सकती है। इससे बिजली बिल में कमी आने में मदद मिलती है।
ऑन-ग्रिड सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बैटरी की जरूरत नहीं होती। इसलिए इसकी शुरुआती लागत अन्य सिस्टम की तुलना में कम होती है। जिन घरों में बिजली कटौती बहुत ज्यादा नहीं होती, उनके लिए यह एक किफायती विकल्प माना जाता है।
ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम की खासियत
Features of off-grid solar systems
ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम उन जगहों के लिए बेहतर होता है जहां बिजली की समस्या ज्यादा रहती है। यह सिस्टम बिजली विभाग के ग्रिड से अलग काम करता है। इसमें सोलर पैनल के साथ बैटरी भी लगाई जाती है, जिसमें दिन के समय बनी बिजली स्टोर हो जाती है।
जब रात होती है या बिजली चली जाती है, तब बैटरी में जमा बिजली का इस्तेमाल घर में किया जाता है। इस वजह से बिजली कटौती के समय भी जरूरी उपकरण चलाए जा सकते हैं।
हालांकि ऑफ-ग्रिड सिस्टम की लागत थोड़ी ज्यादा हो सकती है क्योंकि इसमें बैटरी लगती है। बैटरी की देखभाल और समय के साथ उसे बदलने का खर्च भी ध्यान में रखना पड़ता है। जिन क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता कम है, वहां यह सिस्टम काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
हाइब्रिड सोलर सिस्टम क्यों है खास?
हाइब्रिड सोलर सिस्टम ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड दोनों सिस्टम का मिश्रण होता है। इसमें सोलर पैनल, बैटरी और बिजली ग्रिड तीनों जुड़े होते हैं। इसे आधुनिक और सुविधाजनक सोलर सिस्टम माना जाता है।
इस सिस्टम में दिन के समय बनी बिजली पहले घर में इस्तेमाल होती है। जरूरत से ज्यादा बिजली होने पर उसे बैटरी में स्टोर किया जा सकता है। अगर बैटरी पूरी तरह चार्ज हो जाए तो अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा सकती है।
बिजली कटौती के समय बैटरी बैकअप के कारण घर के जरूरी उपकरण चलते रहते हैं। यही कारण है कि जिन लोगों को बिजली बचत के साथ बैकअप भी चाहिए, उनके लिए हाइब्रिड सोलर सिस्टम एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
घर के लिए कितने किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाएं?
How many kilowatts of solar system should be installed for home?
सोलर सिस्टम की क्षमता घर की बिजली खपत पर निर्भर करती है। इसे चुनने के लिए अपने बिजली बिल को देखना जरूरी होता है। अगर किसी घर में रोजाना बिजली की खपत ज्यादा है तो ज्यादा क्षमता वाला सिस्टम लगाना फायदेमंद हो सकता है।
आम अनुमान के अनुसार:
रोजाना बिजली खपत| सोलर सिस्टम क्षमता
6 यूनिट तक| 1 किलोवाट
12 यूनिट तक| 2 किलोवाट
18 यूनिट तक| 3 किलोवाट
24 यूनिट तक| 4 किलोवाट
हालांकि सही क्षमता तय करने के लिए घर में चलने वाले उपकरणों और भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
सोलर पैनल लगवाने में कितना खर्च आता है?
सोलर सिस्टम की कीमत उसकी क्षमता, पैनल की गुणवत्ता, इन्वर्टर और इंस्टॉलेशन पर निर्भर करती है। छोटे घरों के लिए 1 किलोवाट से 3 किलोवाट तक के सिस्टम काफी लोकप्रिय हैं।
केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर योजना जैसी योजनाओं के तहत पात्र लोगों को सब्सिडी का लाभ मिल सकता है, जिससे सोलर सिस्टम लगवाने का खर्च कम हो सकता है। अलग-अलग राज्यों में नियम और सहायता राशि अलग हो सकती है, इसलिए अपने क्षेत्र के अनुसार जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।
सोलर पैनल लगवाने से शुरुआत में खर्च जरूर आता है, लेकिन लंबे समय में बिजली बिल में काफी बचत हो सकती है। सही क्षमता का सिस्टम और अच्छी गुणवत्ता के उपकरण चुनना जरूरी है ताकि इसका फायदा कई वर्षों तक मिलता रहे।