सोना-चांदी के भाव में बड़ी गिरावट: चांदी ₹10,318 सस्ती, सोना भी टूटा, जानें अपने शहर के नए रेट
सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए 23 जून का दिन बड़ी खबर लेकर आया। लगातार तेजी के बाद अब कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार चांदी की कीमत में एक ही दिन में भारी कमी आई है। एक किलो चांदी का भाव करीब 10,318 रुपये गिरकर 2.27 लाख रुपये पर पहुंच गया है। इससे पहले सोमवार को चांदी 2.37 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर थी।
वहीं सोने की कीमत में भी गिरावट दर्ज की गई है। 24 कैरेट सोना 10 ग्राम के भाव में 2,315 रुपये की कमी आई है और यह करीब 1.45 लाख रुपये पर पहुंच गया है। इससे पहले 22 जून को सोने का भाव लगभग 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था। इस गिरावट के बाद जून महीने में सोने और चांदी दोनों के दाम काफी नीचे आ चुके हैं। सोना इस महीने करीब 10,541 रुपये और चांदी करीब 35,767 रुपये सस्ती हुई है।
जून में क्यों गिर रहे हैं सोना-चांदी के दाम?
सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारणों से होता है। डॉलर की स्थिति, वैश्विक बाजार में मांग, निवेशकों का रुख और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम इनकी कीमतों पर सीधा असर डालते हैं। हाल के दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है, जिसके कारण सोना-चांदी के भाव में गिरावट देखने को मिल रही है।
इस साल की शुरुआत में सोने और चांदी ने तेजी दिखाई थी। 31 दिसंबर 2025 को सोने का भाव करीब 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि इसके बाद से इसमें गिरावट आई और अब तक सोना करीब 31 हजार रुपये से ज्यादा सस्ता हो चुका है।
चांदी की बात करें तो 31 दिसंबर 2025 को इसका भाव करीब 2.30 लाख रुपये प्रति किलो था। 29 जनवरी को यह बढ़कर लगभग 3.86 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद से चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है और यह करीब 1.58 लाख रुपये तक नीचे आ चुकी है।
अलग-अलग शहरों में क्यों बदलते हैं सोने के रेट?
कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि एक ही दिन में अलग-अलग शहरों में सोने की कीमत अलग क्यों होती है। इसका सबसे बड़ा कारण स्थानीय बाजार की स्थिति होती है। सोने की कीमत पर ट्रांसपोर्टेशन, सुरक्षा खर्च, मांग और सप्लाई का असर पड़ता है।
एक शहर से दूसरे शहर तक सोना पहुंचाने में जो खर्च आता है, वह कीमत में शामिल हो जाता है। इसके अलावा जहां सोने की खरीदारी ज्यादा होती है, वहां बाजार की स्थिति के अनुसार रेट में बदलाव हो सकता है। ज्वेलर्स का पुराना स्टॉक और उन्होंने किस कीमत पर सोना खरीदा है, यह भी ग्राहकों को मिलने वाली कीमत को प्रभावित करता है।
दक्षिण भारत में सोने की खपत काफी ज्यादा है, इसलिए वहां बड़ी मात्रा में खरीदारी होती है। इसके अलावा स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन भी बाजार की मांग और उपलब्धता के आधार पर रेट में अंतर ला सकते हैं।
सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
सोना खरीदना भारतीय परिवारों में सिर्फ निवेश नहीं बल्कि भावनाओं से जुड़ा फैसला भी होता है। शादी, त्योहार और खास मौकों पर लोग सोने की खरीदारी करते हैं। ऐसे में खरीदारी करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
हमेशा हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) हॉलमार्क से सोने की शुद्धता की जानकारी मिलती है। सोना खरीदने से पहले उस दिन का भाव जरूर जांच लें। 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमत अलग-अलग होती है।
इसके अलावा सोने का वजन, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क की जानकारी भी जरूर लें। खरीदारी से पहले अलग-अलग जगहों से कीमत की तुलना करने से सही फैसला लेने में मदद मिलती है।
असली चांदी पहचानने के आसान तरीके
चांदी खरीदते समय भी उसकी शुद्धता जांचना जरूरी है। असली चांदी की पहचान के लिए कुछ आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं। जैसे असली चांदी चुंबक से चिपकती नहीं है। अगर कोई धातु चुंबक की ओर आकर्षित होती है तो उसमें मिलावट हो सकती है।
इसके अलावा बर्फ टेस्ट भी किया जाता है। चांदी गर्मी को तेजी से पास करती है, इसलिए असली चांदी पर रखी बर्फ जल्दी पिघल सकती है। सफेद कपड़े से रगड़ने पर भी कई बार इसकी पहचान की जा सकती है। हालांकि सबसे भरोसेमंद तरीका प्रमाणित चांदी खरीदना ही है।
सोना-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ने का असर
सोना और चांदी की कीमतों पर आयात शुल्क का भी प्रभाव पड़ता है। सरकार ने सोने और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी को बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया है। इसमें बेसिक कस्टम ड्यूटी और अन्य शुल्क शामिल हैं। इसका उद्देश्य विदेशों से होने वाली खरीद को नियंत्रित करना और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करना बताया गया है।
आयात शुल्क बढ़ने से घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतों पर असर पड़ सकता है। हालांकि कीमतों का अंतिम फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर और मांग-सप्लाई जैसे कई कारणों पर निर्भर करता है।
भारतीय घरों में जमा सोने की कीमत लाखों करोड़ में
भारत में सोने को हमेशा से सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। कई रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय परिवारों के पास बड़ी मात्रा में सोना मौजूद है। इसकी कीमत बढ़ने के कारण घरेलू सोने की कुल वैल्यू भी काफी बढ़ गई है।
सोना भारतीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। यही कारण है कि कीमतों में छोटी सी हलचल भी आम लोगों और निवेशकों का ध्यान खींचती है।
फिलहाल सोना और चांदी दोनों के भाव में गिरावट का दौर चल रहा है। ऐसे में खरीदारी करने वाले लोगों के लिए यह समय बाजार को समझने और सही जानकारी के साथ फैसला लेने का है। कीमतों में आगे भी बदलाव संभव है, इसलिए खरीदारी से पहले ताजा रेट जरूर जांचना बेहतर रहेगा।