TET अनिवार्यता के विरोध में 7 राज्यों के शिक्षकों का समर्थन, 22 जून को सचिवालय कूच की तैयारी
शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) अनिवार्यता का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने टीईटी अनिवार्यता से छूट और पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। 22 जून को होने वाले सचिवालय कूच को कई राज्यों के शिक्षक संगठनों का समर्थन मिल गया है।
जानकारी के अनुसार दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, गुजरात और असम के शिक्षकों ने इस आंदोलन का समर्थन किया है। इसके साथ ही अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने भी शिक्षकों की मांगों के पक्ष में समर्थन जताया है।
उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ की प्रांतीय तदर्थ समिति के सदस्य दिगंबर सिंह नेगी और देहरादून जिलाध्यक्ष व आंदोलन संयोजक धर्मेंद्र रावत ने विभिन्न कर्मचारी संगठनों को पत्र भेजकर समर्थन मांगा था। इसके बाद कई संगठनों ने सचिवालय कूच में साथ आने की सहमति दी है।
टीईटी मामले पर बैठक, आगे की रणनीति होगी तय
टीईटी अनिवार्यता को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ की प्रांतीय तदर्थ समिति की बैठक देहरादून में आयोजित की जाएगी। समिति के सदस्य मनोज तिवारी के अनुसार बैठक रेसकोर्स स्थित पदम सिंह शिक्षक भवन में सुबह 11 बजे से होगी।
बैठक में 22 जून के सचिवालय कूच की तैयारियों के साथ-साथ आगे के आंदोलन की रणनीति पर भी चर्चा की जाएगी। शिक्षक संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से राहत दी जाए, ताकि उनकी सेवा और पदोन्नति प्रभावित न हो।
एलटी शिक्षकों को राहत देने की मांग
राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व महामंत्री डॉ. सोहन सिंह माजिला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर शिक्षकों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने एलटी (LT) पद पर कार्यरत शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से छूट देने की मांग रखी।
इसके अलावा शिक्षकों की पदोन्नति, स्थानांतरण, अनुरोध आधारित ट्रांसफर और धारा 23 की सूची जारी करने सहित अन्य मांगों पर भी चर्चा की गई। उन्होंने शिक्षकों को प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट देने का भी अनुरोध किया।
माजिला के अनुसार मुख्यमंत्री ने समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर इस विषय पर रास्ता निकाला जाएगा। टीईटी अनिवार्यता के कारण शिक्षकों की सेवा और पदोन्नति प्रभावित न हो, इस दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
टीईटी अनिवार्यता को लेकर अब शिक्षकों की नजर 22 जून के सचिवालय कूच और सरकार के अगले कदम पर है।