Ethanol Fuel: ₹102 का पेट्रोल अब ₹82 में! इथेनॉल से बदल रही भारत की तस्वीर, किसानों से लेकर अर्थव्यवस्था तक को फायदा

Ethanol Fuel: ₹102 का पेट्रोल अब ₹82 में! इथेनॉल से बदल रही भारत की तस्वीर, किसानों से लेकर अर्थव्यवस्था तक को फायदा

भारत में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अब एक ऐसा ईंधन तेजी से चर्चा में है, जो आने वाले समय में देश की ऊर्जा जरूरतों को बदल सकता है। यह है इथेनॉल फ्यूल (Ethanol Fuel)। सरकार ग्रीन मोबिलिटी और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के लिए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर लगातार काम कर रही है। यही वजह है कि अब पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाई जा रही है और आने वाले समय में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के जरिए इसका इस्तेमाल और तेजी से बढ़ सकता है।

 

इथेनॉल न सिर्फ पेट्रोल की कीमतों को कम करने में मदद कर सकता है, बल्कि इससे भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता भी घट सकती है। उदाहरण के तौर पर अगर पेट्रोल की कीमत करीब 102 रुपये प्रति लीटर है तो इथेनॉल मिश्रित ईंधन की लागत कई जगहों पर कम पड़ सकती है। इससे आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला बोझ कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इसका सीधा फायदा मिल रहा है।

 

E85 इथेनॉल फ्यूल की शुरुआत से बढ़ेगी नई उम्मीद

 

भारत में अब E85 पेट्रोल को लेकर कदम आगे बढ़ाए जा रहे हैं। E85 फ्यूल में करीब 80 से 85 प्रतिशत तक इथेनॉल और बाकी पेट्रोल होता है। इस तरह का ईंधन खास तौर पर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए बनाया गया है। सामान्य पेट्रोल वाहनों में इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके लिए अलग तकनीक वाले इंजन की जरूरत होती है।

 

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने पर्यावरण दिवस के मौके पर देश में E85 फ्यूल की शुरुआत की। शुरुआती चरण में इसे दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों के कुछ पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। दिल्ली के पूसा रोड स्थित इंडियन ऑयल पंप को देश के पहले सार्वजनिक E85 फ्यूल डिस्पेंसिंग पॉइंट के रूप में देखा जा रहा है।

 

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। करीब 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आता है, जिस पर हर साल भारी रकम खर्च होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बदलाव का असर सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर दिखाई देता है। ऐसे में इथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन देश के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

 

किसानों को भी मिल रहा है फायदा, मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

 

इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे, मक्का और अधिशेष अनाज से किया जाता है। इससे किसानों के लिए एक नया बाजार तैयार हुआ है। पहले कई बार गन्ने की अधिक पैदावार होने पर चीनी मिलों और किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब अतिरिक्त गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जा रहा है।

 

इससे चीनी उद्योग को भी राहत मिली है। जब चीनी का उत्पादन अधिक होता है तो कीमतों पर दबाव आता है, लेकिन इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से चीनी बाजार में संतुलन बनाने में मदद मिलती है। इससे मिलों की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है और किसानों को भी भुगतान मिलने की संभावना मजबूत हुई है।

 

पिछले कुछ वर्षों में भारत में इथेनॉल उत्पादन क्षमता में काफी वृद्धि हुई है। साल 2013 के आसपास जहां उत्पादन क्षमता लगभग 215 करोड़ लीटर थी, वहीं अब यह कई गुना बढ़ चुकी है। देश में नई डिस्टिलरी और बायो-रिफाइनरी स्थापित होने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

विदेशी मुद्रा की बचत और ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव

इथेनॉल के बढ़ते इस्तेमाल से भारत को कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल सकती है। जब देश में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ेगी तो पेट्रोलियम उत्पादों की मांग का कुछ हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा किया जा सकेगा।

 

इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के कारण भारत ने पिछले वर्षों में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बचाई है। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिलने से प्रदूषण कम करने में भी मदद मिल सकती है।

 

ऑटोमोबाइल कंपनियां भी अब फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों पर काम कर रही हैं। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे इंजन के साथ आते हैं जो पेट्रोल और अधिक मात्रा वाले इथेनॉल मिश्रण दोनों पर चल सकते हैं। कई बड़ी वाहन कंपनियां इस तकनीक पर निवेश कर रही हैं। इससे भारत में ऑटो कंपोनेंट और ग्रीन टेक्नोलॉजी सेक्टर को भी बढ़ावा मिल रहा है।

 

ब्राजील की राह पर भारत, भविष्य में बदल सकती है ईंधन की तस्वीर

 

दुनिया में ब्राजील इथेनॉल इस्तेमाल के मामले में सबसे आगे है। वहां गन्ने से बड़े स्तर पर इथेनॉल बनाया जाता है और कई वाहन फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर चलते हैं। भारत भी अब इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।

 

आने वाले समय में अगर फ्लेक्स-फ्यूल वाहन और E85 जैसे ईंधन ज्यादा लोकप्रिय होते हैं तो पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने के साथ-साथ किसानों, उद्योगों और पर्यावरण को भी फायदा पहुंच सकता है।

इथेनॉल सिर्फ एक वैकल्पिक ईंधन नहीं बल्कि भारत के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम बन सकता है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कैसे इथेनॉल देश के परिवहन क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई बदलाव की कहानी लिखता है।

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