क्या उत्तर प्रदेश सरकार सेवारत शिक्षकों के लिए विभागीय TET करा सकती है? जानिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरा सच
उत्तर प्रदेश के शिक्षा जगत में इस समय एक ही सवाल हर शिक्षक की जुबां पर है—क्या राज्य सरकार हमारे लिए कोई विशेष या विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (Departmental TET) आयोजित कर सकती है? पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ और देश भर के शिक्षक संगठन इस मांग को लेकर लगातार ज्ञापन सौंप रहे हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों के बाद सेवारत (In-service) शिक्षकों के भविष्य को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। हर कोई यह जानना चाहता है कि क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार इस संकट का कोई बीच का रास्ता निकालेगी। आइए, इस पूरे मामले का एक बेहद सरल और कानूनी रूप से सटीक विश्लेषण करते हैं, ताकि आपके मन के सारे संशय दूर हो सकें।
सुप्रीम कोर्ट के 29 मई 2026 के रिव्यू पिटिशन आदेश (State of U.P. v. Anjuman Ishaat-e-Taleem Trust, 2026 INSC 597) ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों और शिक्षक संघों द्वारा दायर की गई 65 से ज्यादा पुनर्विचार याचिकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया। माननीय न्यायालय ने अपने मूल फैसले को सही ठहराते हुए साफ कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) की धारा 23 के तहत देश के सभी सेवारत शिक्षकों के लिए TET पास करना एक अनिवार्य योग्यता (Eligibility Condition) है। चाहे आपकी नियुक्ति आरटीई कानून लागू होने से पहले की ही क्यों न हो, अगर आपकी सेवा के 5 वर्ष या उससे अधिक बचे हैं, तो आपको टीईटी पास करना ही होगा। इसके बिना न तो सेवा सुरक्षित रहेगी और न ही भविष्य में कोई प्रमोशन (पदोन्नति) मिल पाएगी।
हालांकि, इस कड़े फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की व्यावहारिक दिक्कतों को समझा और एक बड़ी मानवीय राहत भी दी। कोर्ट ने अपने विशेषाधिकार (Article 142) का प्रयोग करते हुए पूर्व में तय 2 साल की समयसीमा (31 अगस्त 2027) को एक साल और बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब आगे कोई मोहलत नहीं दी जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द टीईटी परीक्षाओं का आयोजन करें, और संभव हो तो साल में दो बार (लगभग 6-6 महीने के अंतराल पर) परीक्षा कराएं ताकि प्रभावित शिक्षकों को अपनी योग्यता साबित करने के पर्याप्त मौके मिल सकें।
विभागीय TET कराने की विधिक वैधता: क्या यह संभव है?
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार केवल सेवारत शिक्षकों के लिए एक ‘विशेष विभागीय टीईटी’ आयोजित करा सकती है? इसका सीधा और स्पष्ट उत्तर है—हाँ, बिल्कुल करा सकती है। कानूनी तौर पर इसमें कोई विधिक अड़चन नहीं है। जब सुप्रीम कोर्ट खुद राज्यों को परीक्षा जल्द कराने और पर्याप्त अवसर देने के निर्देश दे रहा है, तो राज्य सरकारें ‘डिपार्टमेंटल टीईटी’ का विकल्प चुन सकती हैं। या फिर वे चाहें तो नियमित UPTET परीक्षा के भीतर ही ‘इन-सर्विस टीचर्स’ के लिए एक अलग श्रेणी (Category) बना सकती हैं।
अन्य राज्यों के उदाहरण: देश के कई राज्य इस दिशा में कदम उठा चुके हैं। तमिलनाडु (TN) और आंध्र प्रदेश (AP) जैसे राज्यों ने अपने सेवारत शिक्षकों के लिए ‘विशेष/विभागीय टीईटी’ के नोटिफिकेशन पहले ही जारी कर दिए हैं। वहीं, पंजाब सरकार ने तो अप्रैल 2026 में ही विभागीय टीईटी का सफल आयोजन कराया, जिसके माध्यम से वहां के लगभग 99% प्रभावित शिक्षकों ने परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी नौकरी को सुरक्षित कर लिया है।
उत्तर प्रदेश के संदर्भ में देखें तो परीक्षा नियामक प्राधिकारी या नवनिर्मित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) के माध्यम से ऐसी परीक्षा कराना पूरी तरह कानूनी दायरे में आता है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के नियमों और आरटीई के प्रावधानों के तहत राज्य सरकारों को अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार परीक्षा प्रारूप तय करने की कुछ हद तक स्वतंत्रता होती है। उत्तर प्रदेश में इस समय लगभग 1.86 लाख सेवारत शिक्षक इस आदेश से सीधे प्रभावित हो रहे हैं। पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखकर ही सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दाखिल करने के निर्देश दिए थे। अब जब वह याचिका खारिज हो चुकी है, तो राज्य सरकार के पास पंजाब और तमिलनाडु मॉडल की तर्ज पर विभागीय परीक्षा कराने का रास्ता पूरी तरह खुला हुआ है।
क्या कोई विधिक अड़चन या कोर्ट से स्टे (Stay) लग सकता है?
अक्सर देखा गया है कि जब भी सरकार शिक्षा विभाग में कोई नई नीति या परीक्षा लाती है, तो मामला अदालतों में खिंच जाता है। लेकिन इस मामले में हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से किसी भी प्रकार की रोक (Stay) लगने की संभावना न के बराबर है। इसके पीछे कुछ बेहद मजबूत कानूनी कारण हैं:
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: चूंकि देश की सबसे बड़ी अदालत (SC) खुद रिव्यू पिटिशन खारिज कर चुकी है और टीईटी की अनिवार्यता को सही मान चुकी है, इसलिए अब सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देने का कोई सीधा रास्ता नहीं बचता।
अनुच्छेद 141 के तहत बाध्यता: यदि कुछ असंतुष्ट पक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करते भी हैं, तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत देश की सभी अदालतों पर बाध्यकारी होता है। कोई भी हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत जाकर परीक्षा के आयोजन पर स्थगन आदेश (Interim Stay) नहीं दे सकता।
बच्चों के अधिकारों की सर्वोपरिता: न्यायशास्त्र का यह स्थापित सिद्धांत है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने का अधिकार (Article 21-A) सर्वोपरि है। अदालतें मानती हैं कि शिक्षकों की योग्यता सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य से जुड़ी है, इसलिए इस प्रकार की परीक्षाओं पर रोक लगाकर शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता।
शिक्षकों के लिए व्यावहारिक सलाह और आगे की राह
उत्तर प्रदेश के लाखों प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों के लिए यह समय पैनिक (घबराने) करने का नहीं, बल्कि सूझबूझ से काम लेने का है। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ और उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के नेतृत्व में संगठन लगातार जिलाधिकारियों और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर विभागीय टीईटी की पुरजोर मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन और भारी संख्या को देखते हुए पूरी उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस पर कोई सकारात्मक निर्णय लेगी।
शिक्षकों को हमारी सबसे बड़ी सलाह यही होगी कि वे केवल विभागीय परीक्षा के भरोसे न बैठें। उत्तर प्रदेश में नियमित UPTET 2026 की परीक्षा जुलाई 2026 में प्रस्तावित है। प्रभावित शिक्षकों को अपनी तैयारी अभी से शुरू कर देनी चाहिए और नियमित व संभावित विभागीय, दोनों ही परीक्षाओं को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए। याद रखिए, आपके पास 31 अगस्त 2028 तक का समय है। इस अवधि के भीतर परीक्षा पास करना आपकी गरिमापूर्ण सेवा और पेंशन अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि उत्तर प्रदेश सरकार भी पंजाब सरकार की तरह संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द ही विभागीय टीईटी का रास्ता साफ करेगी, ताकि सालों से नौनिहालों का भविष्य संवार रहे इन शिक्षकों का अपना भविष्य सुरक्षित हो सके।