डीजल पर ₹14 और ATF पर ₹12.50 प्रति लीटर बढ़ी एक्सपोर्ट ड्यूटी, नई दरें लागू
देश में पेट्रोलियम उत्पादों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरों के अनुसार अब डीजल के निर्यात पर ₹14 प्रति लीटर और ATF के निर्यात पर ₹12.50 प्रति लीटर की दर से शुल्क लिया जाएगा। यह बदलाव मंगलवार से लागू हो गया है। हालांकि आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।
पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों और सप्लाई को लेकर सरकार लगातार नजर बनाए हुए है। राजस्व विभाग की ओर से जारी किए गए बदलाव के बाद पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। साथ ही देश के अंदर इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क की दरें भी पहले की तरह ही रखी गई हैं। इसका मतलब है कि वाहन चालकों को फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इस बदलाव की वजह से कोई नई बढ़ोतरी देखने को नहीं मिलेगी।
हर 15 दिन में होती है एक्सपोर्ट ड्यूटी की समीक्षा
सरकार की ओर से पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी की समीक्षा समय-समय पर की जाती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, पेट्रोलियम उत्पादों की मांग और घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इन दरों में बदलाव किया जाता है। पश्चिम एशिया में चल रही अस्थिरता के बीच देश में पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की उपलब्धता बनाए रखने के लिए विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस लगाया गया था।
इन शुल्कों की समीक्षा हर 15 दिन यानी एक पखवाड़े में की जाती है। इससे पहले भी जून की शुरुआत में इन दरों में संशोधन किया गया था। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता मिल सके।
पेट्रोल, डीजल और LPG सप्लाई को लेकर सरकार ने दी जानकारी
पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, LPG और नेचुरल गैस की सप्लाई सामान्य बनी हुई है। मंत्रालय की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे जरूरत के अनुसार ही ईंधन का इस्तेमाल करें और अनावश्यक स्टॉक जमा न करें।
सरकार के अनुसार देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और ईंधन की कोई कमी नहीं है। कुछ स्थानों पर जो परेशानी सामने आई, वह सप्लाई की कमी की वजह से नहीं बल्कि खपत के तरीके में अचानक बदलाव के कारण हुई। मई महीने में बड़ी मात्रा में डीजल जो पहले बल्क उपभोक्ताओं और विशेष पंपों के माध्यम से लिया जाता था, वह अचानक सामान्य रिटेल आउटलेट की ओर चला गया। इससे कुछ जगहों पर भीड़ और दबाव की स्थिति बनी।
रिटेल पंपों पर डीजल बिक्री की 200 लीटर सीमा
रिटेल पंपों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार ने एक अस्थायी व्यवस्था लागू की है। इसके तहत आम उपभोक्ताओं के लिए रिटेल आउटलेट से डीजल खरीद की सीमा 200 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन तय की गई है। वहीं बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं से कहा गया है कि वे निर्धारित पंपों से ही डीजल की आपूर्ति लें।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी ईंधन संकट की वजह से नहीं उठाया गया है, बल्कि सप्लाई व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ समय के लिए लागू किया गया है। यह व्यवस्था लगभग 90 दिनों तक चल सकती है।
डीजल एक्सपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी के बाद भी आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि देश में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनी हुई है। सरकार की कोशिश है कि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ ईंधन व्यवस्था को संतुलित रखा जाए। ऐसे समय में लोगों को भी जिम्मेदारी के साथ ईंधन का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि सभी तक इसकी आसानी से पहुंच बनी रहे।