सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से बिहार के 2.60 लाख शिक्षकों की बढ़ी चिंता, CTET/TET पास करना होगा जरूरी, नहीं तो नौकरी पर संकट
बिहार के लाखों शिक्षकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब राज्य में कार्यरत उन शिक्षकों की परेशानी बढ़ सकती है, जिन्होंने अभी तक CTET या TET परीक्षा पास नहीं की है। जानकारी के अनुसार, दक्षता परीक्षा (Competency Test) में सफल हो चुके शिक्षकों को भी अब शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET/TET) उत्तीर्ण करना जरूरी होगा। अगर तय समय सीमा के अंदर शिक्षक यह योग्यता पूरी नहीं कर पाते हैं तो उनकी नौकरी और पदोन्नति पर असर पड़ सकता है।
बिहार में करीब 2.60 लाख शिक्षक ऐसे बताए जा रहे हैं, जिनके पास अभी तक CTET या TET की योग्यता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इन शिक्षकों को पात्रता परीक्षा पास करने का अवसर दिया गया है। यह फैसला राज्य के शिक्षा क्षेत्र में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि बड़ी संख्या में शिक्षक कई वर्षों से विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
31 अगस्त 2028 तक मिलेगा मौका
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिक्षकों को CTET/TET परीक्षा पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया गया है। इस अवधि के दौरान शिक्षकों को तीन अवसर मिलने की बात कही जा रही है। यानी जो शिक्षक अभी तक पात्रता परीक्षा पास नहीं कर पाए हैं, वे आने वाले समय में परीक्षा देकर अपनी योग्यता पूरी कर सकते हैं।
हालांकि, समय सीमा के अंदर परीक्षा पास नहीं करने वाले शिक्षकों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनकी सेवा से जुड़ी परिस्थितियों पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में शिक्षक अब CTET और TET परीक्षा की तैयारी में जुटने की योजना बना रहे हैं।
करीब 60 हजार शिक्षकों की पदोन्नति पर असर
इस पूरे मामले में लगभग 60 हजार शिक्षकों की पदोन्नति प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। कई शिक्षक ऐसे हैं जो लंबे समय से विभाग में कार्यरत हैं और पदोन्नति की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता पूरी नहीं होने की स्थिति में उनके प्रमोशन पर रोक लग सकती है।
वहीं, 55 वर्ष से अधिक उम्र वाले शिक्षकों को लेकर भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि ऐसे शिक्षकों को सेवा से हटाने की संभावना कम है, लेकिन उनकी पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे उम्रदराज शिक्षकों में भी चिंता बढ़ गई है।
क्या है CTET/TET अनिवार्यता का पूरा मामला?
दरअसल, वर्ष 2011 में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने शिक्षक नियुक्ति के लिए TET को न्यूनतम योग्यता के रूप में लागू किया था। इसके बाद सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए CTET या TET पास करना जरूरी माना गया।
बिहार में नियोजित शिक्षकों को लेकर लंबे समय से यह मामला चर्चा में था। कई शिक्षक संगठनों का कहना था कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति पुराने नियमों के आधार पर हुई थी, उन पर बाद के नियम लागू करना सही नहीं है। उनका तर्क है कि नियुक्ति के समय लागू नियमों के अनुसार ही सेवा शर्तें तय होनी चाहिए।
शिक्षक संगठनों ने जताई चिंता
शिक्षक संगठनों ने इस फैसले को लेकर अपनी आपत्तियां भी सामने रखी हैं। उनका कहना है कि वर्षों से विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों को अचानक नई योग्यता की शर्त में बांधना चुनौतीपूर्ण है। संगठन चाहते हैं कि पुराने शिक्षकों के अनुभव और सेवाकाल को ध्यान में रखते हुए कोई उचित रास्ता निकाला जाए।
दूसरी ओर, पात्रता परीक्षा को शिक्षकों की गुणवत्ता और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से भी देखा जाता है। सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से आगे जारी होने वाले दिशा-निर्देशों के बाद स्थिति और साफ हो सकेगी।
मुख्य जानकारी एक नजर में
विषय| जानकारी
प्रभावित शिक्षक| लगभग 2.60 लाख
बिहार में कुल शिक्षक| लगभग 5.80 लाख
पदोन्नति प्रभावित शिक्षक| करीब 60 हजार
अंतिम समय सीमा| 31 अगस्त 2028
परीक्षा के अवसर| 3 मौके
जरूरी योग्यता| CTET या TET
बिहार के शिक्षकों के लिए यह मामला काफी महत्वपूर्ण बन गया है। आने वाले समय में CTET/TET परीक्षा उन शिक्षकों के लिए जरूरी कदम होगी, जो अपनी सेवा और करियर को सुरक्षित रखना चाहते हैं। अब शिक्षकों की नजर शिक्षा विभाग के अगले निर्देशों पर बनी हुई है। तय समय के भीतर पात्रता परीक्षा पास करना ही उनके भविष्य के लिए सबसे अहम साबित हो सकता है।