UP Teachers News: TET अनिवार्यता से प्रभावित शिक्षकों में जगी नई उम्मीद, योगी सरकार को कहा- थैंक यू

UP Teachers News: TET अनिवार्यता से प्रभावित शिक्षकों में जगी नई उम्मीद, योगी सरकार को कहा- थैंक यू

उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों के लिए टीईटी (Teacher Eligibility Test) से जुड़ा मामला पिछले कई महीनों से चिंता का विषय बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन शिक्षकों के सामने भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए थे, जो वर्षों से सेवा दे रहे हैं लेकिन अब तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं कर सके हैं। ऐसे समय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य सरकार के स्तर पर हुई हालिया पहल ने शिक्षकों के बीच नई उम्मीद जगाने का काम किया है। यही कारण है कि प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद जताई है।

 

बीते दिनों टीईटी अनिवार्यता से प्रभावित शिक्षकों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद शिक्षकों के बीच सकारात्मक संदेश गया। इसके बाद सोमवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी और अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय मिश्र के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा से मुलाकात की। इस दौरान शिक्षकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

 

प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय टीईटी आयोजित कराए जाने और शिक्षकों को वेटेज दिए जाने की मांग प्रमुखता से रखी। शिक्षक नेताओं का कहना है कि वर्षों से विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के अनुभव और सेवा को देखते हुए उनके लिए एक व्यावहारिक और न्यायसंगत समाधान निकाला जाना चाहिए। उनका मानना है कि लंबे समय से बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे शिक्षकों की सेवाओं और अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

 

बैठक के दौरान केवल टीईटी का मुद्दा ही नहीं उठा, बल्कि शिक्षकों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। शिक्षक संगठनों ने मांग की कि प्रदेश में कार्यरत सभी शिक्षकों की सेवाएं सुरक्षित की जाएं। इसके साथ ही एक अप्रैल 2005 से पहले विज्ञापित पदों पर नियुक्त शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिए जाने, अंतर्जनपदीय स्थानांतरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने तथा ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान कराए जा रहे जनगणना कार्य के बदले अर्जित अवकाश प्रदान करने की मांग भी रखी गई।

 

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से समझा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों का पक्ष पूरी संवेदनशीलता के साथ रखा। इसी कारण प्रदेश के शिक्षक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं। शिक्षकों का मानना है कि यदि सरकार इसी तरह सकारात्मक प्रयास करती रही तो भविष्य में कोई संतोषजनक समाधान निकल सकता है।

 

बैठक के बाद शिक्षक प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि अपर मुख्य सचिव ने टीईटी संकट को लेकर आश्वस्त किया है कि राज्य सरकार की मंशा शिक्षकों के हितों की रक्षा करने की है। उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों को नियमों के अनुसार अर्जित अवकाश देने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस आश्वासन से शिक्षकों के बीच राहत का माहौल देखने को मिला है।

मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस योजना: फॉर्म भरने से पहले यह जरूरी, नहीं तो आवेदन में हो सकती है बड़ी गलती

1.86 लाख बेसिक शिक्षकों की विभागीय परीक्षा की तैयारी, CM योगी ने दिए निर्देश

दरअसल, टीईटी अनिवार्यता का मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने पूर्व आदेश पर पुनर्विचार करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक रहेगा। हालांकि शिक्षकों को राहत देते हुए परीक्षा उत्तीर्ण करने की समय सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 तक कर दी गई है। इससे उन शिक्षकों को अतिरिक्त समय मिला है जो अभी तक टीईटी पास नहीं कर सके हैं।

 

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने विभिन्न राज्य सरकारों, शिक्षक संगठनों और व्यक्तिगत शिक्षकों द्वारा दायर 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया था। अदालत ने अपने पूर्व फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए टीईटी एक महत्वपूर्ण मानक है। हालांकि समय सीमा बढ़ने से प्रभावित शिक्षकों को तैयारी के लिए कुछ अतिरिक्त अवसर अवश्य मिल गए हैं।

 

वर्तमान परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश के शिक्षकों की निगाहें राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की आगामी रणनीति पर टिकी हुई हैं। विभागीय टीईटी, वेटेज और अन्य राहत उपायों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। यदि सरकार शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो इससे हजारों नहीं बल्कि लाखों शिक्षकों को राहत मिल सकती है।

 

निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि टीईटी अनिवार्यता को लेकर बना संकट अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन हालिया बैठकों और सरकारी आश्वासनों ने शिक्षकों के मन में नई उम्मीद जरूर पैदा की है। शिक्षकों को भरोसा है कि उनके वर्षों के अनुभव और सेवा को ध्यान में रखते हुए सरकार कोई ऐसा रास्ता निकालेगी जिससे शिक्षा व्यवस्था भी मजबूत हो और शिक्षकों का भविष्य भी सुरक्षित रह सके। आने वाले समय में इस मुद्दे पर होने वाले निर्णय लाखों शिक्षकों के जीवन और करियर को प्रभावित करेंगे, इसलिए सभी की नजरें सरकार और शिक्षा विभाग के अगले कदम पर बनी हुई हैं।

यह भी पढ़े।

कैशलेस हॉस्पिटल लिस्ट उत्तर प्रदेश, देखें अपने जिले का हॉस्पिटल

मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना हेतु आवेदन एवं E-KYC की सम्पूर्ण प्रक्रिया।

बेसिक शिक्षकों, शिक्षामित्रों , अनुदेशकों और रसोइयों आदि के लिए शुरू हुआ रजिस्ट्रेशन, यहाँ करें अप्लाई

3000 रुपये वार्षिक प्रीमियम देकर मिलेगा कैशलेस चिकित्सा लाभ, जानिए क्यों ?

Leave a Comment