यूपी में 33 पीसीएस अफसरों को मिलेगा आईएएस का दर्जा, 10 जून को होगी बड़ी बैठक
उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक महत्वपूर्ण खबर चर्चा का विषय बनी हुई है। राज्य के कई वरिष्ठ पीसीएस अधिकारियों का वर्षों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। केंद्र सरकार द्वारा आईएएस प्रमोशन कोटे के तहत 33 पद आवंटित किए जाने के बाद प्रदेश के पात्र अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में पदोन्नति मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इस संबंध में 10 जून को नई दिल्ली में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की अहम बैठक आयोजित की जाएगी। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
आईएएस पदोन्नति किसी भी पीसीएस अधिकारी के करियर का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। वर्षों की सेवा, प्रशासनिक अनुभव और उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन के आधार पर अधिकारियों को यह अवसर मिलता है। इस बार केंद्र सरकार ने चयन वर्ष 2025 के लिए उत्तर प्रदेश को कुल 33 आईएएस प्रमोशन पद आवंटित किए हैं। इसके बाद राज्य के नियुक्ति विभाग ने पात्र अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर), सेवा अभिलेख और अन्य जरूरी दस्तावेजों को एकत्र करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। डीपीसी बैठक में इन्हीं अभिलेखों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार सबसे अधिक लाभ वर्ष 2010 और 2011 बैच के पीसीएस अधिकारियों को मिलने की संभावना है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2010 बैच में कुल 8 और 2011 बैच में 21 अधिकारी पदोन्नति के लिए पात्र हैं। दोनों बैचों को मिलाकर कुल 29 अधिकारी होते हैं, जबकि इस बार 33 पद उपलब्ध हैं। ऐसे में शेष चार पदों के लिए 2012 बैच के कुछ योग्य अधिकारियों को भी मौका मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यही कारण है कि 2012 बैच के अधिकारियों के बीच भी उत्साह का माहौल बना हुआ है।
संभावित सूची में शामिल अधिकारियों में कई ऐसे नाम हैं जिन्होंने विभिन्न जिलों और विभागों में अपनी प्रशासनिक क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। 2010 बैच में डॉ. विश्राम, अशोक कुमार कन्नौजिया, पुष्पराज सिंह, राजकुमार द्विवेदी, राकेश कुमार पटेल, आलोक कुमार, सुशीला और संजय कुमार सिंह जैसे अधिकारी शामिल हैं। वहीं 2011 बैच में पूनम निगम, संतोष बहादुर सिंह, पंकज वर्मा, प्रदीप कुमार यादव, योगानंद पांडे, विजय कुमार सिंह, अतुल कुमार, डॉ. सुनील कुमार वर्मा, हर्ष देव पांडे सहित कई अन्य अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं। हालांकि अंतिम चयन डीपीसी की संस्तुति और औपचारिक स्वीकृति के बाद ही तय होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभवी पीसीएस अधिकारियों को आईएएस कैडर में शामिल करने से प्रशासनिक कार्यों में और अधिक दक्षता आएगी। ये अधिकारी वर्षों से जमीनी स्तर पर कार्य कर चुके होते हैं, इसलिए उन्हें शासन और प्रशासन की व्यावहारिक चुनौतियों की गहरी समझ होती है। आईएएस पदोन्नति के बाद उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं, जिससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी गति आने की संभावना है।
दूसरी ओर, पुलिस विभाग में भी पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रदेश में आईपीएस कैडर के 29 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इन रिक्तियों को भरने के लिए नियमानुसार 87 पीपीएस अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेजे गए हैं। अब यूपीएससी इन अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, गोपनीय प्रविष्टियों और लंबित मामलों की समीक्षा करेगा। इसके बाद योग्य अधिकारियों को आईपीएस पदोन्नति का लाभ मिल सकेगा।
उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक और पुलिस दोनों सेवाओं में चल रही यह पदोन्नति प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे न केवल अधिकारियों के करियर को नई दिशा मिलेगी, बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यक्षमता भी मजबूत होगी। 10 जून की डीपीसी बैठक पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं। यदि प्रक्रिया निर्धारित समय पर पूरी होती है, तो जल्द ही प्रदेश को 33 नए आईएएस अधिकारी मिल सकते हैं। यह न केवल संबंधित अधिकारियों के लिए बड़ी उपलब्धि होगी, बल्कि राज्य के प्रशासनिक तंत्र के लिए भी एक सकारात्मक और महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।