Silver Gold Rates: चांदी 2 लाख के पार, सोना रिकॉर्ड स्तर पर — जानिए तेजी की वजह और आगे क्या होगा सस्ता जानें?
कीमती धातुओं के बाजार में शुक्रवार को इतिहास रच गया। पहली बार चांदी की कीमत 2 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई, वहीं सोने ने भी अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छू लिया। अचानक आई इस तेजी ने निवेशकों और आम लोगों, दोनों का ध्यान खींच लिया है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी करीब 1600 रुपये की तेजी के साथ 2,00,510 रुपये प्रति किलो पर कारोबार करती दिखी। यह अब तक का सर्वोच्च स्तर है। इसी तरह सोने की कीमत में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला। एमसीएक्स पर सोना लगभग 2500 रुपये चढ़कर 1,34,966 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो इसका नया रिकॉर्ड हाई है। खास बात यह रही कि सोने-चांदी में यह तेजी उस समय आई जब भारतीय शेयर बाजार बंद हो चुका था।

शुक्रवार को शेयर बाजार भी मजबूती के साथ बंद हुआ। निफ्टी करीब 140 अंक चढ़कर 26,000 के ऊपर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स लगभग 450 अंकों की तेजी के साथ 85,267 के स्तर पर क्लोज हुआ। बाजार में सकारात्मक माहौल और वैश्विक संकेतों का असर कमोडिटी बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।
क्यों बढ़े सोने-चांदी के दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में आई इस तेजी के पीछे कई अहम वजहें हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की उपाध्यक्ष और एस्पेक्ट ग्लोबल वेंचर्स की कार्यकारी अध्यक्ष अक्षा कंबोज के अनुसार, डॉलर में कमजोरी और वैश्विक स्तर पर उद्योग उत्पादन में सुधार से चांदी की कीमतों को समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा क्लीन एनर्जी, सोलर पावर और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स जैसे सेक्टरों में बढ़ती मांग भी चांदी की कीमतों को ऊपर ले जा रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2025 में अब तक चांदी की कीमतों में करीब 100 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों के विस्तार से चांदी की औद्योगिक मांग लगातार बढ़ रही है। साथ ही निवेशकों का रुझान भी कमोडिटी निवेश की ओर बढ़ा है, जिससे बाजार में सकारात्मकता बनी हुई है।
इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी टैरिफ को लेकर चिंताएं, केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर सोने-चांदी की खरीद और ईटीएफ में बढ़ता निवेश भी इन कीमती धातुओं की कीमतों को सहारा दे रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
इतिहास गवाह है कि लंबे समय में सोने और चांदी ने निवेशकों को अच्छे रिटर्न दिए हैं। लॉन्ग टर्म निवेश के नजरिए से ये दोनों धातुएं अब भी सुरक्षित विकल्प मानी जाती हैं। हालांकि, मौजूदा समय में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं, ऐसे में शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव या मुनाफावसूली का खतरा बना रह सकता है। भौतिक मांग में कमजोरी, ईटीएफ से निकासी या निवेशकों की मुनाफावसूली से कीमतों में कुछ गिरावट भी देखने को मिल सकती है।
निवेशकों के लिए सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप सोने या चांदी में निवेश करना चाहते हैं लेकिन ऊंची कीमतों के कारण सीधे खरीदारी से हिचक रहे हैं, तो गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ के जरिए धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे बाजार में गिरावट आने पर जोखिम कम होगा और लंबे समय में औसत लागत घटने से बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ेगी।