HDFC Bank के ग्राहकों को तगड़ा झटका! अब इतनी महंगी होगी आपकी होम लोन EMI, पढ़िए डिटेल्स

HDFC Bank के ग्राहकों को तगड़ा झटका! अब इतनी महंगी होगी आपकी होम लोन EMI, पढ़िए डिटेल्स

देश Desh के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक, एचडीएफसी (HDFC Bank) ने एक बड़ा फैसला लिया है. अगर आप एचडीएफसी HDFC बैंक 🏧 के ग्राहक हैं. दरअसल, बैंक bank ने अपनी लेंडिंग रेट्स (उधार देने की दरों) में अहम बदलाव किया है, जिसका सीधा असर आपकी हर महीने mahine जाने वाली ईएमआई (EMI) पर पड़ने वाला है.एचडीएफसी HDFC बैंक bank ने लंबी अवधि के कर्ज, विशेषकर तीन साल Year वाले मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.05 फीसदी का इजाफा कर दिया है. इसका मतलब यह है कि अगर आपका होम लोन या लंबी अवधि का कर्ज इस बेंचमार्क से जुड़ा है, तो आने वाले समय में आपकी ईएमआई EMI का बोझ बढ़ना लगभग तय है. नई दरों के लागू होने के बाद, अब तीन साल का एमसीएलआर 8.55% से बढ़कर 8.60% पर पहुंच गया है.

शॉर्ट-टर्म कर्जदारों को मिली बड़ी राहत

एक तरफ जहां बैंक bank ने लंबी अवधि के कर्जदारों को झटका दिया है, वहीं दूसरी तरफ छोटे और कम अवधि के कर्ज लेने वालों को बड़ी राहत भी दी है. बैंक bank ने ओवरनाइट से लेकर छह महीने तक के एमसीएलआर में 0.05 फीसदी की कटौती की है. इस फैसले से उन कंपनियों company और व्यापारियों को सीधा फायदा पहुंचेगा जो वर्किंग कैपिटल या अपने बिजनेस business के विस्तार के लिए शॉर्ट-टर्म लोन लेते हैं. इस बदलाव के बाद एक महीने mahine का रेट Rate 8.10% से घटकर 8.05% हो गया है. इसी तरह 3 महीने mahine का रेट 8.15% और 6 महीने mahine की अवधि वाला एमसीएलआर अब 8.30% पर आ गया है.

1-2 साल की दरों में कोई बदलाव नहीं

इस पूरी कवायद में बैंक bank ने एक और 2 साल की अवधि वाले एमसीएलआर में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है. ग्राहकों के लिए एक साल Year का रेट 8.35% और दो साल का रेट 8.45% पर ही स्थिर बना हुआ है. इन ताजा बदलावों के बाद, बैंक Bank की ओवरऑल एमसीएलआर दरें अब 8.05% से शुरू होकर 8.60% के बीच आ गई हैं.

क्या होता है MCLR?

अक्सर बैंकिंग banking की तकनीकी भाषा आम आदमी की समझ से परे होती है. आसान शब्दों में समझें तो एमसीएलआर (MCLR) वह न्यूनतम ब्याज दर है, जिससे नीचे कोई भी बैंक b bank अपने ग्राहकों को कर्ज नहीं दे सकता. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसे साल Year 2016 में इसलिए लागू किया था ताकि ग्राहकों को ब्याज दरों में होने वाले बदलावों का सही और पारदर्शी तरीके से फायदा मिल सके. बैंक Bank इसे बाजार से फंड Fund जुटाने की लागत, अपने कामकाज के खर्च और अन्य वित्तीय पैमानों को ध्यान में रखकर तय करते हैं. यही कारण है कि अलग-अलग अवधि के लिए यह दर भी अलग-अलग तय की जाती है, जिससे बाजार और ग्राहकों दोनों का संतुलन बना रहे.

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