नई स्थानांतरण नीति 2026-27 लागू: आपसी सहमति से भी हो सकेंगे तबादले, 31 मई तक पूरी होगी प्रक्रिया

नई स्थानांतरण नीति 2026-27 लागू: आपसी सहमति से भी हो सकेंगे तबादले, 31 मई तक पूरी होगी प्रक्रिया

लखनऊ। प्रदेश सरकार ने राज्यकर्मियों के लिए नई स्थानांतरण नीति 2026-27 लागू कर दी है। प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज ने मंगलवार को इसका शासनादेश जारी किया। नई नीति के तहत अब कर्मचारियों को आपसी सहमति (म्यूचुअल) के आधार पर भी स्थानांतरण की सुविधा दी गई है। इसके अनुसार 31 मई तक सभी तबादले किए जा सकेंगे।

सरकार के इस फैसले का उद्देश्य कर्मचारियों को पारिवारिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर राहत देना है। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी को चिकित्सा कारणों, बच्चों की शिक्षा या सेवा के दौरान माता-पिता के निधन के बाद बच्चों के पालन-पोषण और देखभाल जैसी परिस्थितियों में स्थानांतरण की आवश्यकता हो, तो रिक्त पद उपलब्ध होने पर आपसी सहमति से समायोजन या तबादला किया जा सकेगा।

इसके साथ ही, पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने पर उन्हें यथासंभव एक ही जिले, शहर या स्थान पर तैनात करने का प्रावधान भी किया गया है। वहीं, मंदित या पूर्ण रूप से निशक्त बच्चों के माता-पिता को उनके अनुरोध के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी। शासनादेश में यह भी कहा गया है कि स्थानांतरित कर्मचारियों को निर्धारित समयावधि में कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर उन्हें स्वतः कार्यमुक्त मान लिया जाएगा।

🔹चयन वर्ष में बड़ा बदलाव

प्रदेश सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में भी अहम बदलाव किया है। अब चयन वर्ष की गणना जुलाई के बजाय जनवरी से की जाएगी। नया चयन वर्ष 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक माना जाएगा। यह व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगी।प्रमुख सचिव एम. देवराज द्वारा जारी उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती का वर्ष परिभाषा का प्रतिस्थापन) नियमावली-2026 के अनुसार, वर्तमान चयन वर्ष 1 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक सीमित रहेगा। नई स्थानांतरण नीति कर्मचारियों को अधिक लचीलापन और सुविधा प्रदान करेगी। आपसी सहमति से तबादले, परिवार को प्राथमिकता और चयन वर्ष में बदलाव जैसे कदम प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और कर्मचारी हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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