इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: शिक्षामित्रों के “समान वेतन” पर सरकार 2 माह में ले फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक ताज़ा सुनवाई में शिक्षामित्रों के मुद्दे पर ऐसी बात सामने आई है, जिसने एक बार फिर उम्मीद जगा दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस मंजूरानी चौहान ने साफ कहा कि “समान कार्य के लिए समान वेतन” जैसे अधिकार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी सीधे उन हजारों शिक्षामित्रों से जुड़ी है, जो लंबे समय से अपने वेतन और सम्मान की मांग करते आ रहे हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करे और दो महीने के भीतर कोई ठोस फैसला ले। यह बात छोटी नहीं है, क्योंकि पहली बार इतनी स्पष्ट समय-सीमा के साथ सरकार को सोचने और निर्णय लेने के लिए कहा गया है। ऐसे में शिक्षामित्रों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि अब शायद उनकी मांग पर कुछ ठोस कदम उठे।
हालांकि मामला यहीं खत्म नहीं होता। पहले भी 25 जुलाई 2017 के आदेश को जिस तेजी से लागू किया गया था, उसे देखते हुए कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि अगर सरकार चाहे, तो इस बार भी फैसला लेने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। अब पूरी नजर सरकार के रुख पर टिकी है—वह इस निर्देश को कितनी प्राथमिकता देती है और किस तरह का निर्णय सामने आता है।
शिक्षामित्रों के बीच यह भावना भी साफ दिख रही है कि अब सिर्फ इंतजार करने से काम नहीं चलेगा। अलग-अलग संगठनों के जरिए सरकार से संवाद बढ़ाने और अपनी बात मजबूती से रखने की जरूरत है। क्योंकि अंततः निर्णय सरकार को ही लेना है, और वही तय करेगा कि इस लंबे संघर्ष का नतीजा क्या होगा।
फिलहाल, इतना जरूर है कि कोर्ट की यह टिप्पणी एक नई उम्मीद लेकर आई है। अब देखना यह है कि आने वाले दो महीनों में यह उम्मीद हकीकत बनती है या फिर मामला फिर से लंबा खिंचता है।