झुलसाती गर्मी में स्कूल जाना मुश्किल! टाइम बदलने की मांग तेज, सरकार क्या लेगी फैसला?
उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे तापमान चढ़ रहा है, वैसे-वैसे स्कूलों के समय को लेकर चर्चा भी तेज हो गई है। भीषण गर्मी और लू के असर को देखते हुए परिषदीय स्कूलों का टाइम बदलने की मांग सामने आई है। इस मुद्दे को लेकर विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री और बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर latest update के तौर पर तुरंत फैसला लेने की अपील की है।
बच्चों की सेहत सबसे बड़ी चिंता
संघ के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी का कहना है कि दोपहर की तेज धूप अब सिर्फ असहज नहीं, बल्कि खतरनाक होती जा रही है। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति ज्यादा गंभीर बन जाती है। लू लगने का खतरा, थकान और dehydration जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं। ऐसे में सुबह का समय बच्चों के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है।
इसी वजह से सुझाव दिया गया है कि स्कूलों का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक कर दिया जाए। इससे पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी और बच्चों को तपती धूप से भी राहत मिलेगी।
ग्रामीण इलाकों में मुश्किलें और बढ़ जाती हैं
प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान ने एक अहम बात उठाई। उन्होंने बताया कि परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे गांवों से आते हैं। उनके पास न तो बस की सुविधा होती है और न ही कोई निजी वाहन। ऐसे में कई बच्चों को रोजाना लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है।

अब सोचिए, जब दोपहर में तापमान चरम पर होता है, उस समय घर लौटना कितना मुश्किल हो जाता होगा। यही वजह है कि शिक्षक संगठन इसे सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत मान रहा है।
क्या हो सकता है समाधान
अगर समय में बदलाव किया जाता है, तो इससे कई समस्याएं एक साथ हल हो सकती हैं। सुबह के ठंडे माहौल में पढ़ाई बेहतर होती है। बच्चों की उपस्थिति भी बढ़ती है और स्वास्थ्य संबंधी खतरे कम हो जाते हैं। कई राज्यों में पहले भी ऐसी व्यवस्था लागू की जा चुकी है, जहां गर्मी के दिनों में स्कूल जल्दी खुलते और जल्दी बंद हो जाते हैं।