Tet news:- 80 हजार शिक्षकों पर बढ़ा दबाव, टीईटी पास करना अब नौकरी से जुड़ा सवाल
सरकारी प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में काम कर रहे हजारों शिक्षकों के सामने इस समय एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। अब करीब 80 हजार शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी पास करना जरूरी हो गया है। यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं रह गई, बल्कि सीधे तौर पर नौकरी से जुड़ गई है। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह साफ हो गया कि टीईटी क्वालिफाई करना अनिवार्य रहेगा। ऐसे में जो शिक्षक अभी तक यह परीक्षा पास नहीं कर पाए हैं, उनके मन में स्वाभाविक रूप से चिंता बढ़ गई है।
प्रदेश में कुल मिलाकर लगभग 1.93 लाख शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से करीब 42 प्रतिशत शिक्षक ऐसे हैं जो अभी तक टीईटी पास नहीं कर सके हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में शिक्षकों के सामने नौकरी बचाने का सवाल खड़ा हो गया है। लंबे समय से पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए यह स्थिति थोड़ी असहज है, क्योंकि उन्होंने अपने अनुभव के दम पर वर्षों तक पढ़ाया है, लेकिन अब उन्हें फिर से परीक्षा देनी पड़ रही है।
शिक्षकों की मांग और परीक्षा की कठिनाई ने बढ़ाई चिंता
शिक्षक संगठनों की तरफ से लगातार यह मांग उठती रही है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति आरटीई लागू होने से पहले हुई थी, उन्हें टीईटी से छूट दी जानी चाहिए। उनका तर्क है कि जो लोग 20–25 साल से लगातार पढ़ा रहे हैं, उनकी योग्यता पहले ही साबित हो चुकी है। ऐसे में उन्हें दोबारा परीक्षा में बैठाना सही नहीं लगता। इसके अलावा विभागीय परीक्षा का विकल्प देने की बात भी सामने आई, ताकि अनुभवी शिक्षकों को थोड़ी राहत मिल सके।
फरवरी में आयोजित टीईटी परीक्षा ने भी शिक्षकों की परेशानी को कम नहीं किया। बड़ी संख्या में शिक्षक परीक्षा में शामिल हुए, लेकिन बहुत कम लोग पास हो सके। कई शिक्षकों का कहना है कि पेपर अपेक्षा से ज्यादा कठिन था। जो लोग लंबे समय से स्कूल में पढ़ा रहे हैं, उनके लिए दोबारा उसी तरह की तैयारी करना आसान नहीं होता। यही वजह है कि अब या तो नियमों में कुछ बदलाव की उम्मीद की जा रही है या फिर किसी वैकल्पिक व्यवस्था की मांग तेज हो गई है।
जिलों में असर और आगे क्या हो सकता है
इस फैसले का असर कुछ जिलों में ज्यादा देखने को मिल रहा है। कोंडागांव, महासमुंद, बलौदाबाजार और सरगुजा जैसे जिलों में बड़ी संख्या में शिक्षक इस दायरे में आते हैं। इसके अलावा रायगढ़, जांजगीर-चांपा, गरियाबंद, सूरजपुर और बलरामपुर जैसे जिलों में भी हजारों शिक्षकों को टीईटी पास करना होगा। इन आंकड़ों से साफ है कि मामला सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर इसका असर पड़ सकता है।
सरकार की तरफ से फिलहाल यही कहा जा रहा है कि किसी भी शिक्षक का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। मामले को लेकर विभाग में लगातार चर्चा चल रही है और शिक्षकों की मांगों पर भी विचार किया जा रहा है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आगे चलकर कोई ऐसा रास्ता निकले, जिससे नियम भी बने रहें और शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी भी न हो।
कुल मिलाकर स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर बड़ा फैसला सामने आ सकता है। तब तक शिक्षकों के लिए यही सही रहेगा कि वे स्थिति पर नजर बनाए रखें और अपने स्तर पर तैयारी भी जारी रखें, ताकि किसी भी परिस्थिति में परेशानी कम हो।