ग्रीष्मावकाश घटाने के प्रस्ताव पर बवाल, शिक्षा मंत्री से मिले शिक्षक संगठन, 45 दिन से घटाकर 36 दिन 

ग्रीष्मावकाश घटाने के प्रस्ताव पर बवाल, शिक्षा मंत्री से मिले शिक्षक संगठन, 45 दिन से घटाकर 36 दिन 

राजस्थान में शिक्षकों के ग्रीष्मावकाश को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि कम करने के प्रस्ताव के विरोध में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने शिक्षा मंत्री Madan Dilawar से मुलाकात की और अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि आगामी सत्र 2026-27 के लिए ग्रीष्मावकाश को 45 दिन से घटाकर 36 दिन करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। उन्होंने इस फैसले को शिक्षकों के हित के खिलाफ बताते हुए इसे लागू न करने की मांग की है।

ग्रीष्मावकाश कम करने के प्रस्ताव का विरोध

जिलाध्यक्ष अवधेश शर्मा और जिला मंत्री राजकुमार ने बताया कि पहले ही शिक्षकों पर कार्यभार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में छुट्टियों में कटौती से न केवल शिक्षकों पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि उनकी कार्यक्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए और वर्तमान व्यवस्था को ही जारी रखा जाए।

अन्य मांगों पर भी हुई चर्चा

बैठक के दौरान शिक्षक संगठनों ने कई अन्य मुद्दे भी उठाए। इनमें अध्यापक पात्रता परीक्षा को लेकर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने, संविदा शिक्षकों के स्थायीकरण और स्कूलों में खाली पदों को जल्द भरने की मांग शामिल रही।

शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से ये मुद्दे लंबित हैं और इन पर जल्द निर्णय लिया जाना जरूरी है।

स्कूलों में स्टाफ की कमी बड़ा मुद्दा

संगठनों ने यह भी बताया कि प्रदेश के कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि जल्द स्टाफिंग पैटर्न लागू किया जाए और बड़ी संख्या में रिक्त पदों को स्वीकृति दी जाए, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।

सरकार के फैसले पर टिकी नजर

फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है, लेकिन शिक्षक संगठनों के विरोध के बाद अब सरकार के अगले कदम पर सबकी नजरें हैं।

यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आगे विरोध और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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