29,334 सहायक अध्यापक भर्ती: दस साल की लड़ाई के बाद मिली नौकरी, 1,113 शिक्षकों को केवल 6–7 साल ही पढ़ाने का मौका

29,334 सहायक अध्यापक भर्ती: दस साल की लड़ाई के बाद मिली नौकरी, 1,113 शिक्षकों को केवल 6–7 साल ही पढ़ाने का मौका

प्रयागराज: परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान और गणित विषय के लिए निकली 29,334 सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़ी एक नई सूची मंगलवार को जारी की गई। इस सूची में 1,113 अभ्यर्थियों के नाम शामिल हैं। इन अभ्यर्थियों का सरकारी शिक्षक बनने का सपना आखिरकार पूरा हो गया है, लेकिन इसके साथ एक कड़वी सच्चाई भी जुड़ी है—कई चयनित उम्मीदवारों को सेवा के लिए बहुत कम समय मिल पाएगा।

दरअसल, इस भर्ती से जुड़े कई अभ्यर्थियों ने करीब दस साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। अब जब नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ है, तब उनकी उम्र सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुकी है। ऐसे में उन्हें अध्यापन के लिए केवल छह से नौ साल का ही समय मिल पाएगा।

दस साल की कानूनी लड़ाई के बाद मिली नौकरी

इस भर्ती की प्रक्रिया की शुरुआत 11 जुलाई 2013 को हुई थी। उस समय अनारक्षित वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष तय की गई थी, जबकि ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को लगभग 45 वर्ष या उससे अधिक आयु तक आवेदन की छूट दी गई थी।

कई अभ्यर्थियों ने पूरी उम्मीद के साथ आवेदन किया और चयन प्रक्रिया में भाग लिया। लेकिन 2017 में नई सरकार बनने के बाद काउंसिलिंग प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई। इसके बाद मामला अदालतों में पहुंच गया और हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लंबी कानूनी प्रक्रिया चलती रही।

आखिरकार 29 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ। यह फैसला उन अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया, जो वर्षों से नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे।

उम्र बढ़ने से सेवा अवधि कम

इस भर्ती से जुड़े कई उम्मीदवारों की स्थिति कुछ ऐसी है कि उन्होंने जितने साल अदालतों में नौकरी के लिए संघर्ष किया, उससे भी कम समय उन्हें नौकरी में मिलेगा।

उदाहरण के तौर पर आजमगढ़ के फैजुल्लाहपुर गांव के मनोज कुमार चौहान को लें। जब भर्ती निकली थी तब उनकी उम्र 43 वर्ष थी और वे आरक्षित वर्ग के तहत आवेदन के पात्र थे। लेकिन कानूनी प्रक्रिया लंबी चलने के कारण अब उनकी उम्र 56 वर्ष हो चुकी है।

चूंकि परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष होती है, इसलिए मनोज कुमार को केवल लगभग छह साल ही पढ़ाने का अवसर मिल पाएगा।

ऐसा ही मामला अमरोहा के चन्द्रपाल सिंह का है, जिनका जन्म 10 सितंबर 1970 को हुआ था। उनका चयन भी करीब 56 वर्ष की उम्र में हुआ है, इसलिए उन्हें भी सीमित समय तक ही सेवा का अवसर मिलेगा।

इसी तरह मुजफ्फरनगर के बलकेश, जिनका जन्म 2 सितंबर 1973 को हुआ, उन्हें लगभग 53 वर्ष की उम्र में नौकरी मिलने जा रही है। ऐसे में वे करीब नौ साल बाद सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

सूची में शामिल कई अन्य अभ्यर्थियों की स्थिति भी लगभग ऐसी ही है, जिन्हें दस साल से भी कम समय के लिए अध्यापन का मौका मिलेगा।

शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर उठी मांग

इस बीच शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर भी आवाज उठाई गई है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रदेश संरक्षक डॉ. हरिप्रकाश यादव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में शिक्षकों की सेवा सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को मजबूत करने और इन्हें अधिनियम में शामिल करने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि इससे शिक्षकों के अधिकार और सेवा शर्तों को बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी।

इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने यह भी अनुरोध किया कि प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य के पदों के लिए नया विज्ञापन जल्द जारी किया जाए और भर्ती प्रक्रिया को तय समय के भीतर पूरा किया जाए।

एक और महत्वपूर्ण सुझाव यह दिया गया कि नई भर्ती में हाईस्कूल स्तर तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी आवेदन करने की अनुमति देने के लिए आवश्यक संशोधन किए जाएं।

निष्कर्ष

29,334 सहायक अध्यापक भर्ती का latest update कई अभ्यर्थियों के लिए राहत भरा जरूर है, क्योंकि वर्षों के इंतजार के बाद उन्हें नौकरी मिलने जा रही है। लेकिन दूसरी ओर, लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण कई चयनित शिक्षकों को बहुत कम समय तक ही सेवा देने का मौका मिलेगा।

ऐसे मामलों ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि भर्ती प्रक्रियाओं में देरी का सबसे बड़ा असर आखिरकार उम्मीदवारों के करियर पर ही क्यों पड़ता है। भविष्य में यदि भर्ती प्रक्रियाएं समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरी हों, तो शायद ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।

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