सरकारी स्कूल ने रचा इतिहास, 1360 बच्चों के नामांकन से बना प्रदेश का नंबर वन विद्यालय, सम्मानित किया

सरकारी स्कूल ने रचा इतिहास, 1360 बच्चों के नामांकन से बना प्रदेश का नंबर वन विद्यालय, सम्मानित किया

आमतौर पर गांवों और कस्बों में अभिभावक अपने बच्चों को निजी अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ाना बेहतर मानते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सरकारी स्कूलों को लेकर बनी धारणा को काफी हद तक बदल दिया है।

सिकंदरपुर स्थित कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय ने इस साल नामांकन के मामले में नया इतिहास बना दिया है। यहां कुल 1360 विद्यार्थियों का एडमिशन दर्ज किया गया है, जो पूरे प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में सबसे ज्यादा माना जा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार बुलंदशहर का एक विद्यालय 1304 नामांकन के साथ दूसरे स्थान पर है।

यह latest update सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

राज्य स्तर पर मांगी गई थी नामांकन की रिपोर्ट

राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी की ओर से 27 फरवरी को सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को एक पत्र भेजा गया था। इस पत्र में उन सरकारी स्कूलों की जानकारी मांगी गई थी, जहां 232 से अधिक बच्चों का नामांकन हुआ है।

साथ ही official details में यह भी निर्देश दिया गया कि ऐसे विद्यालयों में बच्चों, अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के सक्रिय सदस्यों के लिए सम्मान समारोह आयोजित किया जाए।

इस पहल का मकसद यह जानना था कि आखिर किन सरकारी स्कूलों में पढ़ाई और व्यवस्था इतनी बेहतर है कि वहां नामांकन लगातार बढ़ रहा है।

पूरे प्रदेश में 7800 से अधिक स्कूलों की पहचान

निर्देश जारी होने के बाद प्रदेश भर में सर्वे कराया गया। रिपोर्ट के अनुसार 232 से ज्यादा नामांकन वाले लगभग 7800 परिषदीय विद्यालय चिन्हित किए गए।

इन सभी स्कूलों में बलिया का कंपोजिट विद्यालय सिकंदरपुर सबसे आगे रहा। ग्रामीण क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद यहां बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जो सरकारी शिक्षा के लिए उत्साहजनक उदाहरण माना जा रहा है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी स्कूल में बेहतर माहौल और भरोसेमंद शिक्षण व्यवस्था होती है, तो अभिभावक भी अपने बच्चों को वहीं भेजना पसंद करते हैं।

1916 में स्थापित हुआ था यह विद्यालय

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह के अनुसार, इस विद्यालय की स्थापना वर्ष 1916 में हुई थी। लगभग एक सदी पुराना यह स्कूल आज भी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाए हुए है।

विद्यालय का परिसर करीब ढाई एकड़ में फैला हुआ है। यहां आधुनिक सुविधाओं को भी जोड़ा गया है ताकि बच्चों को बेहतर माहौल मिल सके।

स्कूल में एस्ट्रोलैब, आईसीटी लैब और ओपन जिम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यही कारण है कि आसपास के गांवों और कस्बों के अभिभावक अपने बच्चों का नामांकन यहां कराने में रुचि दिखाते हैं।

38 शिक्षक संभाल रहे हैं कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई

विद्यालय में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई होती है। बच्चों की संख्या अधिक होने के बावजूद यहां 38 शिक्षक पढ़ाने के लिए तैनात हैं।

अभिभावकों का कहना है कि यहां शिक्षकों की समय पर उपस्थिति और पढ़ाई की गुणवत्ता अच्छी है। यही वजह है कि सरकारी स्कूल होने के बावजूद इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

चूंकि स्कूल मुख्य बाजार के पास स्थित है, इसलिए भी बच्चों को आने-जाने में सुविधा रहती है।

पूर्वांचल के कई जिलों में भी बढ़ा नामांकन

केवल बलिया ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल के कई जिलों में सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ती दिख रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक मीरजापुर में 196, सोनभद्र में 171, जौनपुर में 164, चंदौली में 152, वाराणसी में 139 और बलिया, आजमगढ़ तथा भदोही में 132-132 ऐसे स्कूल हैं, जहां 232 से अधिक नामांकन दर्ज हुआ है।

इसके अलावा गाजीपुर में 93 और मऊ में 58 विद्यालय इस सूची में शामिल हैं।

मार्च में होंगे सम्मान समारोह

राज्य परियोजना कार्यालय के निर्देश के अनुसार मार्च के अंतिम सप्ताह में नामांकन बढ़ाने के लिए विशेष गतिविधियां चलाई जाएंगी।

25 से 30 मार्च के बीच चयनित विद्यालयों में सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे। इसमें उन बच्चों, अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने स्कूल के विकास में सक्रिय भूमिका निभाई है।

सरकारी स्तर पर यह पहल स्कूलों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के उद्देश्य से भी देखी जा रही है।

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