कांशीराम जयंती पर सपा मनाएगी ‘PDA दिवस’, 15 मार्च को हर जिले में होंगे कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन आंदोलन से जुड़े मुद्दे एक बार फिर चर्चा में हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी ने 15 मार्च को बहुजन आंदोलन के प्रमुख नेता कांशीराम की जयंती को खास तरीके से मनाने का फैसला किया है। पार्टी ने घोषणा की है कि इस दिन पूरे प्रदेश में ‘बहुजन समाज दिवस’ या ‘PDA दिवस’ के रूप में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस संबंध में पार्टी के सभी जिला कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि 15 मार्च को विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। पार्टी की ओर से कहा गया है कि यह आयोजन केवल जयंती समारोह नहीं होगा, बल्कि बहुजन समाज की एकता और सामाजिक न्याय के विचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास भी रहेगा।
अखिलेश यादव के निर्देश: हर जिले में होगा आयोजन
पार्टी नेतृत्व ने साफ किया है कि 15 मार्च को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों और पार्टी कार्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों में कांशीराम के जीवन, उनके संघर्ष और बहुजन आंदोलन में उनके योगदान पर चर्चा की जाएगी।
सपा नेतृत्व का कहना है कि पार्टी पहले से ही PDA यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के महापुरुषों को सम्मान देती रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कांशीराम की जयंती को भी बड़े स्तर पर मनाने का फैसला किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आगामी राजनीतिक रणनीति से भी जुड़ा हो सकता है, क्योंकि प्रदेश की राजनीति में सामाजिक समीकरण हमेशा अहम भूमिका निभाते रहे हैं।
बहुजन आंदोलन में कांशीराम की भूमिका
कांशीराम को देश में बहुजन आंदोलन के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने अपने पूरे जीवन में दलित, पिछड़े, आदिवासी और अन्य वंचित वर्गों की आवाज उठाने का काम किया।
सपा की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कांशीराम ने अपने जन्मदिन को भी समाज के कमजोर वर्गों की एकता और भाईचारे के लिए समर्पित करने की बात कही थी। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए अब इसे ‘बहुजन समाज दिवस’ या PDA दिवस के रूप में मनाने की योजना बनाई गई है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि समाज में बिखरी हुई हजारों जातियों के बीच एकता और संवाद स्थापित करना ही इस दिवस का मुख्य उद्देश्य है।
1992 में मुलायम सिंह और कांशीराम के बीच हुआ था समझौता
राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो वर्ष 1992 में कांशीराम और मुलायम सिंह यादव के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक समझौता हुआ था। उस समय दोनों नेताओं ने सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों को लेकर साथ काम करने का निर्णय लिया था।
बताया जाता है कि उसी दौर में मुलायम सिंह यादव ने इटावा से कांशीराम को लोकसभा चुनाव में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद वर्ष 1993 में प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला और मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सरकार बनी।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उस समय बना यह सामाजिक गठजोड़ उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।
इन महापुरुषों को भी सपा देती है सम्मान
समाजवादी पार्टी का कहना है कि वह PDA विचारधारा से जुड़े कई महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर नियमित कार्यक्रम आयोजित करती है। पार्टी कार्यालयों में इन महान नेताओं के विचारों और योगदान पर चर्चा की जाती है।
इनमें महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, डॉ. राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, चौधरी चरण सिंह, मुलायम सिंह यादव, कांशीराम, बीपी मंडल, कर्पूरी ठाकुर, जनेश्वर मिश्र, ज्योतिबा फुले, शाहू जी महाराज, सावित्रीबाई फुले, अहिल्याबाई होल्कर, संत रविदास, संत गाडगे, शिव दयाल चौरसिया, झलकारी बाई, ऊदा देवी पासी, अवंती बाई लोधी और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे नाम शामिल हैं।
पार्टी का कहना है कि इन महापुरुषों के विचार सामाजिक समानता, शिक्षा और न्याय के मूल्यों को मजबूत करते हैं।
निष्कर्ष
कांशीराम की जयंती को PDA दिवस के रूप में मनाने का फैसला उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। 15 मार्च को होने वाले कार्यक्रमों के जरिए समाजवादी पार्टी बहुजन आंदोलन और सामाजिक न्याय की विचारधारा को फिर से प्रमुखता देने की कोशिश करती दिख रही है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि इस आयोजन का राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है और प्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा आगे किस दिशा में जाता है।