LPG price increased: सिलेंडर की कीमतों में 115 रुपये बढ़ोतरी, अब कितना मिलेगा सिलेंडर, नई दरें लागू
देशभर में रसोई गैस इस्तेमाल करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए latest update सामने आई है। 7 मार्च से घरेलू और व्यावसायिक दोनों तरह के एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। तेल कंपनियों के official announcement के अनुसार अब रसोई गैस सिलेंडर के लिए पहले से ज्यादा कीमत चुकानी होगी।
इस बदलाव का सीधा असर आम घरों के बजट के साथ-साथ होटल, रेस्तरां और छोटे कारोबारों पर भी पड़ेगा, क्योंकि कमर्शियल सिलेंडर के दाम में ज्यादा बढ़ोतरी की गई है।
घरेलू LPG सिलेंडर के नए रेट
तेल कंपनियों की तरफ से जारी official details के मुताबिक 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की वृद्धि की गई है। नई दरें 7 मार्च से पूरे देश में लागू हो गई हैं।
कुछ बड़े शहरों में घरेलू सिलेंडर की कीमत अब इस प्रकार है:
शहर
पुरानी कीमत
नई कीमत
दिल्ली
₹853
₹913
मुंबई
₹852.50
₹912.50
कोलकाता
₹879
लगभग ₹939
चेन्नई
₹868.50
₹928.50
इस बढ़ोतरी के बाद कई परिवारों के मासिक खर्च पर असर पड़ सकता है, खासकर उन घरों में जहां गैस का उपयोग ज्यादा होता है।
कमर्शियल सिलेंडर भी हुआ महंगा
सिर्फ घरेलू गैस ही नहीं, बल्कि 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में भी 115 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। इसका असर मुख्य रूप से होटल, ढाबा, कैटरिंग और छोटे व्यवसायों पर पड़ने की संभावना है।
मुख्य शहरों में कमर्शियल सिलेंडर की नई कीमतें इस प्रकार हैं:
शहर
पुरानी कीमत
नई कीमत
दिल्ली
₹1768.50
₹1883
मुंबई
₹1720.50
₹1835
कोलकाता
₹1875.50
₹1990
चेन्नई
₹1929
₹2043.50
व्यापारियों का कहना है कि गैस महंगी होने से खाना-पीना से जुड़े कारोबार की लागत भी बढ़ सकती है।
अप्रैल 2025 के बाद पहली बड़ी बढ़ोतरी
दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत अप्रैल 2025 से लगभग स्थिर बनी हुई थी। उस समय गैर-सब्सिडी सिलेंडर की कीमत 853 रुपये थी। अब लगभग एक साल बाद कीमत में यह बढ़ोतरी की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की स्थिति और आयात लागत जैसे कारक अक्सर गैस कीमतों को प्रभावित करते हैं।
सरकार का बयान: ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता नहीं
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने हाल ही में कहा कि देश में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों के लिए किफायती और स्थिर ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
मंत्री के अनुसार, भारत के पास पर्याप्त ऊर्जा संसाधन मौजूद हैं और उपभोक्ताओं को गैस या ईंधन की उपलब्धता को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
तेल कंपनियों ने भी दी सफाई
Indian Oil Corporation ने भी सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
कंपनी के मुताबिक आपूर्ति और वितरण नेटवर्क सामान्य रूप से काम कर रहा है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सही जानकारी के लिए केवल official sources पर भरोसा करें।
ऊर्जा आपूर्ति मजबूत, रूस से आयात बढ़ा
सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कच्चे तेल के आयात के स्रोतों को काफी विविध बनाया है।
2022 से भारत ने Russia से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया है। पहले यह हिस्सा बहुत कम था, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। फरवरी के आंकड़ों के अनुसार भारत के कुल आयात का लगभग 20% हिस्सा रूस से आया।
LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश
सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि देश में रसोई गैस की कमी न हो, सभी रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आदेश जारी कर कहा है कि रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का अधिकतम उपयोग एलपीजी उत्पादन में करें। इससे घरेलू गैस की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कदम
सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत आदेश जारी करते हुए रिफाइनरियों से कहा है कि उत्पादित एलपीजी केवल तीन प्रमुख तेल कंपनियों —
Indian Oil Corporation
Bharat Petroleum
Hindustan Petroleum
को ही उपलब्ध कराई जाए।
इसके साथ ही प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनाने में सीमित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि रसोई गैस की उपलब्धता प्रभावित न हो।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, LPG सिलेंडर की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी आम उपभोक्ताओं और व्यापार दोनों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। नई दरें 7 मार्च से लागू हो चुकी हैं, इसलिए अगली बार गैस बुक करते समय आपको बढ़ी हुई कीमत चुकानी पड़ सकती है।
हालांकि सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि देश में ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह स्थिर है और उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा नीति के आधार पर कीमतों में फिर बदलाव हो सकता है।