परिषदीय विद्यालयों में PTM का आयोजन, अभिभावकों से नियमित उपस्थिति पर जोर
लखीमपुरखीरी में परिषदीय विद्यालयों ने इस बार अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) को सिर्फ औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहने दिया। इसे बच्चों की पढ़ाई और नियमित उपस्थिति से जोड़कर एक अभियान का रूप दिया गया। इस latest update के तहत जिला प्रशासन ने भी स्पष्ट संकेत दे दिए कि अब उपस्थिति केवल रजिस्टर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कक्षा में दिखाई भी देनी चाहिए।
प्रशासन की सक्रियता और Official Details
जिला अधिकारी ने विकास खंड स्तर के अधिकारियों के साथ बैठक कर शैक्षिक गतिविधियों की समीक्षा की। बैठक में साफ कहा गया कि विद्यालयों में चल रहे पंजीकरण, योजनाओं का लाभ और अन्य शैक्षणिक अभियानों का online process समय पर पूरा हो।
साथ ही important guidelines जारी करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे फील्ड स्तर पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करें। केवल कागजी रिपोर्ट से काम नहीं चलेगा — स्कूल में बच्चों की उपस्थिति, पढ़ाई का माहौल और अनुशासन, सब कुछ प्रत्यक्ष रूप से देखा जाएगा।
निरीक्षण और जमीनी समीक्षा
निर्देशों के बाद अधिकारियों ने कई विद्यालयों का दौरा किया। कक्षाओं में जाकर बच्चों की उपस्थिति देखी गई, शिक्षण कार्य की स्थिति जानी गई और विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण का आकलन किया गया।
PTM के दौरान अभिभावकों से सीधे संवाद किया गया। कई जगह देखा गया कि जिन बच्चों की उपस्थिति नियमित है, उनके परिणाम भी बेहतर हैं। वहीं जिन छात्रों की हाजिरी कम रहती है, उनकी पढ़ाई में पिछड़ने की संभावना बढ़ जाती है। यह बात उदाहरण के तौर पर समझाई गई ताकि अभिभावक स्थिति की गंभीरता को महसूस कर सकें।
अभिभावकों की भूमिका पर जोर
बैठक में अधिकारियों ने साफ कहा कि बच्चे की सफलता केवल स्कूल की जिम्मेदारी नहीं है। घर और स्कूल दोनों की साझेदारी से ही बेहतर परिणाम मिलते हैं।
नियमित रूप से स्कूल आने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को प्रोत्साहित किया गया। वहीं जिन छात्रों की उपस्थिति कम थी, उनके परिजनों से व्यक्तिगत बातचीत कर सलाह दी गई कि वे बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दें।
सरकारी विद्यालयों में मिलने वाले government benefits — जैसे छात्रवृत्ति, निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, यूनिफॉर्म आदि — का लाभ भी उन्हीं बच्चों को सही मायने में मिलता है जो नियमित रूप से विद्यालय आते हैं। इस पहलू को भी अभिभावकों के सामने रखा गया।
Eligibility, पंजीकरण और समयबद्ध कार्य
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि विभिन्न शैक्षिक योजनाओं में eligibility की शर्तों को ध्यान में रखते हुए पंजीकरण समय से पूरा किया जाए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी पात्र छात्र का नामांकन या लाभ छूट न जाए।
इस संबंध में विभाग द्वारा जल्द ही एक official announcement जारी करने की बात भी कही गई, जिसमें आगे की रणनीति और निगरानी व्यवस्था की जानकारी होगी।
क्यों जरूरी है यह पहल?
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर देखा जाता है कि मौसम, पारिवारिक काम या अन्य कारणों से बच्चे अनियमित हो जाते हैं। शुरुआत में यह छोटी बात लगती है, लेकिन धीरे-धीरे पढ़ाई में अंतर बढ़ता जाता है।
प्रशासन का मानना है कि यदि समय रहते उपस्थिति पर ध्यान दिया जाए तो परिणामों में सुधार स्वतः दिखाई देगा। नियमित निगरानी, अभिभावकों की सहभागिता और विद्यालयों की सक्रिय भूमिका — यही इस अभियान की तीन मुख्य कड़ियाँ हैं।
निष्कर्ष
लखीमपुरखीरी में आयोजित यह PTM केवल एक बैठक नहीं, बल्कि शिक्षा सुधार की दिशा में एक संगठित प्रयास के रूप में सामने आया है। अब देखना होगा कि जारी की गई guidelines और निगरानी व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितना असर दिखाती है।
एक बात स्पष्ट है — जब अभिभावक, शिक्षक और प्रशासन साथ खड़े हों, तो बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता और उपस्थिति दोनों में सकारात्मक बदलाव आना तय है।