शिक्षक समायोजन के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान, ट्विटर अभियान से लेकर दिल्ली में महारैली तक तैयारी
शिक्षक समायोजन के मुद्दे को लेकर प्रदेशभर के शिक्षकों ने अब खुलकर मोर्चा खोलने का निर्णय लिया है। लंबे समय से चल रही नाराजगी के बीच अब आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की रणनीति तय कर ली गई है। इस संबंध में विभिन्न शिक्षक संगठनों की बैठक के बाद कार्यक्रम की रूपरेखा जारी की गई, जिसमें सोशल मीडिया अभियान से लेकर जिला स्तर पर धरना और नई दिल्ली में महारैली तक की घोषणा की गई है।
आंदोलन की शुरुआत 22 फरवरी 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से होगी। इस दिन दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक हैशटैग (#) अभियान चलाया जाएगा। शिक्षक संगठन का कहना है कि इस ऑनलाइन अभियान के जरिए देशभर में शिक्षक समायोजन से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा, ताकि सरकार तक उनकी आवाज मजबूती से पहुंच सके। अभियान में अधिक से अधिक शिक्षकों और समर्थकों से भागीदारी की अपील की गई है।

इसके बाद 23 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक तीन दिन तक शिक्षक काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे। यह विरोध शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक होगा। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि काली पट्टी बांधकर पढ़ाने का उद्देश्य यह संदेश देना है कि शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए भी नीतिगत फैसलों से आहत हैं। इन तीन दिनों में विद्यालयों में पढ़ाई नियमित रूप से चलेगी, लेकिन विरोध का संदेश भी स्पष्ट रूप से दिया जाएगा।
आंदोलन का अगला चरण 26 फरवरी 2026 को जिला स्तर पर होगा। इस दिन दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। धरने के बाद शिक्षक BSA कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च करेंगे। वहां जिलाधिकारी के माध्यम से भारत सरकार को ज्ञापन भेजा जाएगा, जो माननीय प्रधानमंत्री को संबोधित होगा। शिक्षकों की मांग है कि समायोजन प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए और प्रभावित शिक्षकों के हितों की रक्षा की जाए।
आंदोलन का सबसे बड़ा कार्यक्रम मार्च के तीसरे सप्ताह में प्रस्तावित है। इस दौरान राजधानी नई दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में महारैली आयोजित की जाएगी। शिक्षक संगठनों का दावा है कि इस रैली में प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में शिक्षक भाग लेंगे। रैली के बाद भारत सरकार को सामूहिक रूप से ज्ञापन सौंपा जाएगा।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण होगा। उनका उद्देश्य सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करना है, न कि शैक्षणिक व्यवस्था को बाधित करना। संगठन के पदाधिकारियों ने शिक्षकों से अपील की है कि वे अनुशासन बनाए रखें और तय कार्यक्रम के अनुसार ही भागीदारी करें।
फिलहाल सरकार की ओर से इस आंदोलन को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन जिस तरह से चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की गई है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में शिक्षक समायोजन का मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विषय बन सकता है।
अब सबकी निगाहें 22 फरवरी को होने वाले ट्विटर अभियान पर टिकी हैं, जिससे इस आंदोलन की दिशा और प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकेगा।