Latest Update: पत्नी की याद में शिक्षक ने आयुर्वेदिक अस्पताल के लिए दान कर दिया अपना घर
आज के दौर में जहां संपत्ति को लेकर रिश्तों में खटास तक आ जाती है, वहीं उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से आई यह खबर मानवता की मिसाल बन गई है। रिटायर्ड शिक्षक चंद्र प्रकाश बाथम ने अपनी पत्नी की स्मृति में अपना निजी भवन आयुर्वेदिक विभाग को दान कर दिया, ताकि आम लोगों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
यह कदम सिर्फ एक दान नहीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणादायक official announcement जैसा संदेश है—अगर इरादा नेक हो, तो निजी संपत्ति भी जनसेवा का माध्यम बन सकती है।
क्यों लिया यह फैसला?
फर्रुखाबाद में आयुर्वेदिक अस्पताल पहले दूसरी मंजिल पर संचालित हो रहा था। वहां तक पहुंचने के लिए मरीजों—खासकर बुजुर्गों और जोड़ों के दर्द से परेशान लोगों—को सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं। गठिया या घुटनों की समस्या से जूझ रहे मरीजों के लिए यह किसी परीक्षा से कम नहीं था।
रोज़ाना की इस परेशानी को देखते हुए चंद्र प्रकाश बाथम ने बड़ा निर्णय लिया। उन्होंने प्रशासन को सूचित कर अपना भवन आयुर्वेदिक विभाग को सौंप दिया, ताकि अस्पताल भूतल पर शिफ्ट हो सके और मरीजों को राहत मिल सके।
कई बार हम सोचते हैं कि बदलाव सरकार ही लाएगी, लेकिन यहां एक नागरिक ने आगे बढ़कर उदाहरण पेश किया।
पत्नी का सपना बना जनसेवा का माध्यम
फतेहगढ़ स्थित हाथीखाना क्षेत्र में रहने वाले केंद्रीय विद्यालय के रिटायर्ड शिक्षक चंद्र प्रकाश बाथम की पत्नी विमला देवी का 10 अक्टूबर 2023 को निधन हो गया था। दंपति की कोई संतान नहीं थी।
परिवार के करीबी लोगों के अनुसार, विमला देवी चाहती थीं कि उनका घर किसी अच्छे कार्य में लगे, जिससे आम लोगों को फायदा हो। पत्नी के निधन के बाद, शिक्षक ने उनके इस सपने को साकार करते हुए भवन आयुर्वेदिक विभाग को दान कर दिया।
यह फैसला भावनात्मक भी था और सामाजिक रूप से जिम्मेदार भी—एक तरह से यह सच्चे अर्थों में government benefits को मजबूत करने जैसा कदम है।
अब रोज़ सैकड़ों मरीजों को मिल रहा इलाज
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आदित्य किशोर के अनुसार, इस नए भवन में प्रतिदिन लगभग 150 से 200 मरीज उपचार के लिए आते हैं। सबसे खास बात यह है कि यहां मरीज मात्र एक रुपये के पर्चे पर आयुर्वेदिक इलाज करा सकते हैं।
यहां जोड़ों का दर्द, गठिया, अर्थराइटिस, त्वचा रोग, लीवर की समस्या, खुजली और पाइल्स जैसी बीमारियों का उपचार किया जाता है।
आज जब निजी अस्पतालों में इलाज महंगा होता जा रहा है, ऐसे में यह सुविधा जरूरतमंदों के लिए बड़ी राहत है।
Eligibility, सुविधाएं और जरूरी दिशानिर्देश
इस आयुर्वेदिक चिकित्सालय में इलाज के लिए किसी जटिल eligibility प्रक्रिया की जरूरत नहीं है। सामान्य पंजीकरण के बाद मरीज अपना उपचार शुरू करा सकते हैं।
भविष्य में यदि विभाग द्वारा कोई नया online process या डिजिटल पंजीकरण प्रणाली लागू की जाती है, तो उसकी official details भी सार्वजनिक की जाएंगी। फिलहाल मरीज सीधे अस्पताल पहुंचकर पर्चा बनवाकर इलाज ले सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी important guidelines के अनुसार, यहां आयुर्वेदिक पद्धति से नियमित जांच और दवा वितरण किया जाता है।
अस्पताल का स्थान और पहुंचने का मार्ग
यह चिकित्सालय फतेहगढ़ में राजपूत रेजीमेंट के सामने, मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय के पास वाले मार्ग पर, हाथीखाना क्षेत्र में स्थित है। यह स्थान पुराना जिला अस्पताल और डॉक्टर स्व. बीड़ी कटियार के भवन के सामने के इलाके में पड़ता है।
स्थानीय लोगों के लिए यहां पहुंचना आसान है और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के मरीज भी यहां इलाज के लिए आ रहे हैं।
समाज के लिए एक प्रेरक संदेश
कभी-कभी एक व्यक्ति का छोटा-सा निर्णय सैकड़ों परिवारों के लिए राहत का कारण बन जाता है। चंद्र प्रकाश बाथम का यह कदम हमें याद दिलाता है कि संपत्ति का असली मूल्य तब है, जब वह समाज के काम आए।
यह कहानी सिर्फ फर्रुखाबाद की नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपने संसाधनों से समाज को कुछ लौटाना चाहते हैं।
निष्कर्ष
पत्नी की स्मृति में भवन दान कर शिक्षक ने यह साबित किया है कि सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जो दूसरों के जीवन में सुविधा और उम्मीद लेकर आए। अब यह आयुर्वेदिक अस्पताल सैकड़ों मरीजों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा दे रहा है—और यही इस पहल की सबसे बड़ी सफलता है।