Viral Video: मिड-डे मील में एक बाल्टी पानी में दो पैकेट दूध मिलाने का मामला सुर्खियों में वीडियो वायरल

Viral Video: मिड-डे मील में एक बाल्टी पानी में दो पैकेट दूध मिलाने का मामला सुर्खियों में वीडियो वायरल

 

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को देने के लिए एक बाल्टी पानी में सिर्फ दो पैकेट दूध मिलाते हुए दिखाया गया है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराज़गी देखी जा रही है और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या दिख रहा है वीडियो में?
वायरल क्लिप में एक व्यक्ति बाल्टी में पानी भरता है और उसमें दो छोटे दूध के पैकेट डालकर घोलता नजर आता है। दावा किया जा रहा है कि यही मिश्रण स्कूल के बच्चों को परोसा गया। हालांकि, वीडियो किस तारीख और किस स्कूल का है, इसकी official details अभी स्पष्ट नहीं हैं।
मिड-डे मील योजना क्या है?
भारत सरकार की प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (पूर्व में मिड-डे मील योजना) का उद्देश्य सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत बच्चों को तय मानकों के अनुसार भोजन और कभी-कभी दूध भी दिया जाता है, ताकि उनकी पोषण स्थिति बेहतर हो और स्कूल में उपस्थिति बढ़े।
नियम क्या कहते हैं?
सरकारी important guidelines के मुताबिक, बच्चों को दिए जाने वाले भोजन में पोषण मानक तय होते हैं। दूध या अन्य खाद्य सामग्री की मात्रा आयु वर्ग और कक्षा के अनुसार निर्धारित की जाती है। यदि वायरल वीडियो में दिखाया गया दावा सही पाया जाता है, तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
अब तक स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत official announcement सामने नहीं आया है। हालांकि, ऐसे मामलों में आमतौर पर जांच के आदेश दिए जाते हैं और संबंधित जिम्मेदार लोगों से जवाब तलब किया जाता है। कई बार वीडियो का पूरा सच सामने आने पर पता चलता है कि क्लिप अधूरी या भ्रामक भी हो सकती है, इसलिए जांच पूरी होने तक अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगा।
अभिभावकों की चिंता
इस तरह के वीडियो सामने आने से अभिभावकों में स्वाभाविक रूप से चिंता बढ़ जाती है। आखिर मिड-डे मील जैसी योजना का मकसद बच्चों को पौष्टिक भोजन देना है, न कि सिर्फ औपचारिकता निभाना। अगर कहीं भी government benefits का सही तरीके से उपयोग नहीं हो रहा है, तो यह पूरे सिस्टम के लिए सवाल खड़ा करता है।
आगे क्या?
फिलहाल जरूरी है कि संबंधित विभाग वीडियो की सच्चाई की जांच करे और यदि गड़बड़ी पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, स्कूलों में भोजन वितरण की monitoring process को और पारदर्शी बनाने की जरूरत है, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
निष्कर्ष यही है कि वायरल वीडियो ने एक बार फिर मिड-डे मील व्यवस्था पर ध्यान खींचा है। अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई और latest update पर टिकी हुई है।

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