दो शिक्षक, पाँच कक्षाएँ और 80 बच्चे यही है सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत

दो शिक्षक, पाँच कक्षाएँ और 80 बच्चे यही है सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत

बुनियादी शिक्षा को किसी भी समाज की नींव कहा जाता है, लेकिन जब यही नींव कमजोर हो जाए तो भविष्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है। मुरादाबाद के कई सरकारी प्राथमिक स्कूलों की स्थिति कुछ ऐसी ही तस्वीर पेश कर रही है, जहाँ संसाधनों की कमी बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर डाल रही है।

एक शिक्षक, दो कक्षाएँ – पढ़ाई या मजबूरी?

बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पास स्थित प्राथमिक विद्यालय कन्या दांग में हालात चिंताजनक हैं। यहाँ केवल दो शिक्षक, कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। करीब 80 से ज्यादा छात्र इस स्कूल में पंजीकृत हैं, लेकिन कक्षाओं की संख्या और शिक्षकों की उपलब्धता के बीच तालमेल नहीं बैठ पा रहा।

प्रधानाचार्य का साफ कहना है कि शिक्षकों की भारी कमी के कारण एक शिक्षक को एक साथ दो कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाना पड़ रहा है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उम्मीद करना आसान नहीं।

स्मार्ट सिटी योजना, लेकिन ज़मीन पर सवाल

सरकार की स्मार्ट सिटी योजना के तहत स्कूल का कायाकल्प तो किया गया, लेकिन उसकी गुणवत्ता अब सवालों के घेरे में है।

स्कूल में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे दो महीने से बंद पड़े हैं। एक कमरे को पुस्तकालय में बदल दिया गया है, जिसके बाद सिर्फ चार कमरे बचे हैं। इनमें से तीन कमरों में ही पाँच कक्षाएँ चलाई जा रही हैं, जबकि एक कमरा अभी मरम्मत का इंतजार कर रहा है।

समय से पहले छुट्टी, वजह बनी नमाज़

बेसिक स्कूल कानून गोयान में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। स्कूल का समय सुबह 10 बजे से शाम 3 बजे तक निर्धारित है, लेकिन यहां करीब 2:30 बजे ही छुट्टी कर दी गई।

स्कूल में कुल 112 बच्चे पंजीकृत हैं, हालांकि प्रतिदिन करीब 80 छात्र ही उपस्थित रहते हैं।

2:45 बजे स्कूल परिसर में केवल एक शिक्षिका मौजूद मिलीं। उन्होंने बताया कि बच्चों को नमाज़ पढ़नी होती है, इसलिए समय से पहले छुट्टी कर दी जाती है। स्कूल में कुल तीन शिक्षक हैं, लेकिन कमरों की कमी के चलते कक्षाएं अक्सर बरामदे में लगानी पड़ती हैं।

दो साल में ही उखड़ने लगा “कायाकल्प”

कंपोजिट विद्यालय मुगलपुरा में स्मार्ट सिटी योजना के तहत कराई गई मरम्मत अब अपनी पोल खोल रही है।

दीवारों से प्लास्टर झड़ने लगा है, छतों में सीलन आ चुकी है और बारिश में पानी टपकता है। प्रधानाचार्य का कहना है कि मरम्मत के नाम पर सिर्फ पुताई कर दी गई, जिससे असली समस्याएं जस की तस बनी रहीं।

यहाँ 222 छात्र पढ़ते हैं और नौ शिक्षक तैनात हैं, लेकिन कैमरे यहां भी बंद पड़े हैं और नालियां बैठ चुकी हैं।

64 स्कूल, 10,935 छात्र और शिक्षकों की भारी कमी

शहर के 64 सरकारी बेसिक स्कूलों में कुल 10,935 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। नियमानुसार इन स्कूलों में 365 शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन फिलहाल केवल 203 नियमित शिक्षक ही तैनात हैं। यह आंकड़ा साफ करता है कि शिक्षा व्यवस्था किन चुनौतियों से जूझ रही है।

आधिकारिक बयान

इस पूरे मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी, नगर मुरादाबाद वेगीश सिंह गोयल का कहना है—

“इस संबंध में अभी कोई जानकारी नहीं है। जानकारी लेकर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”

निष्कर्ष

सरकारी योजनाएं कागजों में मजबूत दिखती हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे अलग कहानी बयां करती है।

अगर समय रहते शिक्षकों की भर्ती, बुनियादी सुविधाओं में सुधार और निगरानी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो इसका सीधा नुकसान उन बच्चों को होगा, जिनका भविष्य इन्हीं स्कूलों से जुड़ा है।

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