8th Pay : केंद्रीय कर्मचारियों के HRA और सिटी कैटेगरी में हो सकते हैं बदलाव, 8वां वेतन आयोग करेगा फैसला
केंद्रीय कर्मचारियों को लंबे समय से 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। माना जा रहा है कि इन सिफारिशों को लागू होने में अभी लगभग डेढ़ साल का समय लग सकता है। इस बीच कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगें तेज कर दी हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस वेतन आयोग के जरिए बेसिक सैलरी से लेकर महंगाई भत्ते (DA) तक कई बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।
यह भी माना जा रहा है कि 8वां वेतन आयोग केवल वेतन बढ़ोतरी तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के बीच मौजूद आर्थिक अंतर को भी प्रभावित कर सकता है।
HRA में बदलाव की संभावना
8वां वेतन आयोग हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की दरों में बड़ा संशोधन कर सकता है। खासकर शहरी क्षेत्रों में किराया, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यकताओं पर खर्च अधिक होता है। ऐसे में यदि HRA की दरों में बढ़ोतरी होती है तो शहरों में कार्यरत कर्मचारियों को इसका अधिक लाभ मिल सकता है।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन-यापन की लागत अपेक्षाकृत कम होने के कारण वेतन वृद्धि का वास्तविक फायदा बचत के रूप में अधिक दिखाई दे सकता है।
सिटी कैटेगरी में भी हो सकता है बदलाव
8वें वेतन आयोग में शहरों की कैटेगरी को लेकर भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत शहरों को X, Y और Z कैटेगरी में बांटा गया है। यदि नए वेतन आयोग में इस वर्गीकरण में बदलाव किया जाता है तो छोटे शहरों और कस्बों में कार्यरत कर्मचारियों को अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।
इसके अलावा ट्रैवल अलाउंस (TA) में भी बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगें
हाल ही में नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) की एक महत्वपूर्ण बैठक में 8वें वेतन आयोग से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस बैठक में वेतन संरचना, पदोन्नति नीति, वार्षिक वेतन वृद्धि और पेंशन सुधार जैसे विषयों पर विचार किया गया।
आयोग द्वारा अपनी वेबसाइट पर पूछे गए 18 सवालों के जवाब निर्धारित समयसीमा में भेजने पर भी सहमति बनी है। बताया जा रहा है कि अगले 10 से 15 दिनों के भीतर सभी कर्मचारी संगठनों की मांगों को शामिल करते हुए एक संयुक्त ज्ञापन तैयार किया जाएगा, जिसे आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना देसाई को सौंपा जाएगा।

पेंशन को लेकर भी उठी मांग
बैठक में फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि कर्मचारियों और करीब 68 लाख पेंशनभोगियों व पारिवारिक पेंशनरों के लिए समान फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए।
इसके अलावा प्रतिनिधियों ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू करने की मांग भी एक बार फिर दोहराई।